बीजेपी के ख़िलाफ़ एकजुट होगा जनता परिवार?

  • 15 अप्रैल 2015
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Image caption मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में ये विलय हो रहा है

दिल्ली में बुधवार को जनता परिवार की छह पार्टियों की अहम बैठक हो रही है जिसमें विलय को लेकर कोई फ़ैसला हो सकता है.

राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव पहले ही अपने पार्टी के विलय की घोषणा कर चुके हैं.

'एक झंडा और एक निशान' के तहत अभी तक छह पार्टियां साथ आने को राज़ी हो चुकी हैं, जिनमें समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड, इंडियन नेशनल लोकदल, जनता दल सेक्युलर और समाजवादी जनता पार्टी शामिल हैं.

लालू यादव कह चुके हैं कि विलय पर सहमति हो चुकी है, और अब ऐलान तो बस औपचारिकता है.

वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे नाकाम नेताओं का जमावड़ा कह कर खारिज कर रही है.

बिहार पहली परीक्षा

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इस नई पार्टी की पहली परीक्षा बिहार में होगी जहां इस साल के आख़िर में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसका सामना भारतीय जनता पार्टी से होगा.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी मुखिया लालू यादव को उम्मीद है कि एक साथ आने से दोनों पार्टियों के वोट एक साथ पड़ेंगे और वो भाजपा का रास्ता रोकने में कामयाब रहेंगे.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी जनता परिवार के विलय पर चुटकी ले रही है. पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा कहते हैं, "जनता परिवार एक परिवार तो है लेकिन इसके साथ जनता नहीं है."

वहीं कई आलोचक विलय की कोशिशों पर ये कह कर भी सवाल उठाते हैं कि नई पार्टी में दिग्गज नेताओं को समाहित करना आसान नहीं होगा क्योंकि मुलायम सिंह हो या लालू यादव, नीतीश कुमार हो या देवगौड़ा या फिर चौटाला परिवार, सभी के अपने हित और अपनी महत्वकांक्षाएं हैं.

बावजूद इसके, भारतीय जनता पार्टी के उभार ने इन सभी दलों के अस्तित्व के लिए चुनौती पैदा की है, जिससे निपटने के लिए उन्होंने विलय का ये तरीका खोजा है.

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