एनकाउंटर: 25 पुलिसवालों पर मामला दर्ज

  • 16 अप्रैल 2015
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मीना खलखो मुठभेड़ कांड में सीआईडी ने 25 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

11 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया है, जबकि 14 अन्य पुलिसकर्मियों पर इस हत्या में सहयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.

इस मामले की जांच के लिये एडीशनल आईजी, नेहा चंपावत के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है.

मीना का माओवादी होना या ना होना

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Image caption छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह

इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घोषणा की थी कि इस मामले में न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सीआईडी को उचित कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिये गये हैं.

गौरतलब है कि 6 जुलाई 2011 को सरगुजा के करचा गांव के पास पुलिस ने कथित माओवादियों के साथ एनकाउंटर में 17 साल की मीना खलखो को मारने का दावा किया था.

लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि मीना का माओवादियों से कोई लेना-देना नहीं है और पुलिस उसे घर से उठा कर ले गई और गोली मार दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ये बाद सामने आई कि मीना को पास से गोली मारी गई थी. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने मीना के साथ बलात्कार की भी आशंका जताई थी.

माओवादी को मुआवज़ा क्यों?

Image caption छत्तीसगढ़ में तैनात सुरक्षाबल

ग्रामीणों और मानवाधिकार संगठनों के विरोध के बाद सरकार ने मीना के परिजनों को दो लाख का मुआवजा दिया और मीना के भाई को सरकारी नौकरी भी दी गई.

विपक्षी दलों का कहना था कि अगर सरकार मीना को माओवादी मानती है तो उसने परिजनों को मुआवजा क्यों दिया और अगर ऐसा नहीं है तो इस मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

राज्य सरकार ने 30 अगस्त, 2011 को पूरे मामले की जांच बिलासपुर की ज़िला न्यायाधीश अनिता झा से 3 महीने के भीतर कराने की घोषणा की थी.

लेकिन अनिता झा की सेवानिवृत्ति के लगभग 4 साल बाद यह रिपोर्ट पिछले हफ्ते ही सामने आई है.

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