राहुल: ट्विटर पर 'परिवार भक्त' भी मौन

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के 56 दिनों के बाद वापसी पर सोशल मीडिया पर भी हलचल है.

ट्विटर पर #RahulReturns भारत में टॉप ट्रेडिंग बना रहा.

ज़्यादातर लोगों ने इस ख़बर पर जमकर चुटकियां लीं. हलांकि कुछ लोगों ने राहुल का बचाव भी किया लेकिन ऐसा करने वालों की संख्या बेहद कम थी.

हैरानी की बात तो ये है कि बात-बात पर गांधी परिवार का समर्थन और बचाव करने के लिए मैदान में उतरने को तैयार कई कांग्रेसी नेता भी उनकी वापसी पर ख़ामोश ही रहे.

दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी, आरपीएन सिंह और अजय माकन जैसे नेता भी चुप हैं.

मज़ाक

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कुनाल बिलागी नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "अच्छा है राहुल लौट आए, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल अब ऊबाउ लग रहा था."

टेलीविज़न अभिनेत्री श्वेता तिवारी के नाम से ट्विटर हैंडल @imShwetaTiwari ने लिखा है, "मुझे लगता है सोनिया गांधी अब कार्टून चैनल का सब्सक्रिप्शन दोबारा लेंगी."

नवीन ने लिखा, "बीजेपी के सबसे बड़े चुनाव प्रचारक बिहार चुनाव से ठीक पहले आ गए."

एक पाठक ने लिखा, "राहुल 56 दिनों तक चाय बनाना सीख कर वापस आ गए हैं. ताकि वो पीएम बन सकें."

बचाव

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कुछ लोगों ने राहुल गांधी का समर्थन भी किया और भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया.

शेख़ अहमद लिखते हैं, "राहुल वापसी के बजाय मोदी वापसी पर ध्यान देना चाहिए. जो हमेशा विदेश में ही घूमते रहते हैं और देश की जनता को किए वादों पर अमल नहीं करते."

मशहूर पत्रकार शेखर गुप्ता ने लिखा, "57 दिन के स्वनिर्वासन और टीवी चैनलों के पागलपन वाले कवरेज के बाद राहुल गांधी वापस लौट आए. शुक्र है जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तब टीवी चैनल नहीं थे."

कुलदीप ने लिखा, "राहुल की वापसी से बीजेपी को झटका लगा क्योंकि अब उन्हें अपनी सरकार की नाकामी छुपाने के लिए किसी नए विषय को खोजना होगा."

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