कुछ मिनटों की शोहरत, और घंटों हलकान

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दिल्ली की पहली महिला बस ड्राइवर को नौकरी के पहले दिन अहसास हुआ कि मीडिया में छा जाना मज़ा ही नहीं सज़ा भी है.

सुबह जब वी सरिता अपनी पहली ड्यूटी पर पहुँची तो उन्होंने बस नम्बर 543 को कैमरों और पत्रकारों से घिरा पाया.

सब के वही सवाल कि सरिता जी आप कैसा महसूस कर रही हैं?

जवाब देते-देते सरिता की घबराहट, परेशानी में और परेशानी झल्लाहट में बदल गई.

सरिता और डीटीसी के अधिकारी चिल्लाते हुए कह रहे थे कि भाई बस आगे बढ़ने तो दो पर पत्रकार हर एंगल से शूट करने में लगे थे.

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किसी तरह सरिता की बस चली.

मैं भी मुसाफ़िरों में शामिल हो ली.

बस के साथ कुछ चैनलों की कारें भी साथ चल दीं. चंद शॉट के बाद पत्रकार तो चले गए पर बस ख़राब हो गई और साथ ही सरिता का मूड भी.

पर सरिता को मीडिया से ज़्यादा शिकायत नहीं हुई कहना था ''वो हमेशा ही हीरो बने रहना चाहती हैं.''

वो कहती हैं, "सबका एक दिन होता है. मीडिया पूछे ना पूछे आज के बाद, आज का दिन तो मेरा है."

रास्ता बताते लोग

कंडक्टर वीर सिंह से सरिता ने शिकायत की और कहा कि वे बड़े अधिकारी से इस बात की शिकायत करेंगी कि उन्हें अच्छी बस क्यों नहीं दी गई.

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कंडक्टर के फ़ोन पर आनन फ़ानन में दो टेक्नीशियन आ गए. इधर का उधर तार जोड़ा और दरवाज़े ठीक हो गए.

बस आगे बढ़ी. बस स्टॉप पर खड़े लोगों अजीब तरीके से उन्हें देख रहे थें. उनको देखते हुए बस में दाखिल हो रहे थे.

बस में पहले से बैठे कुछ ऐसे भी यात्री थे जिन्हें पता नहीं था कि बस एक महिला चला रही थी. जैसे ही उन्हें पता चला कि बस ड्राइवर एक महिला तो वे आगे बढ़ कर सरिता को देखने लग गए.

कुछ लोग सरिता की फ़ोटो भी लेने लग गए.

पत्रकारों और बस की ख़राबी से जान छूटी तो घनघनाते फ़ोन ने हलाकान कर दिया. उनके फ़ोन पर पिछले दो दिनों से लगातार बधाई देने का सिलसिला चालू है. खैर उन्होंने अपना फ़ोन भी बंद कर दिया.

काफ़िला आगे बढ़ा. कुछ यात्री ऐसे भी थे जो उनको रास्ता बता रहे थें.

थैंक्यू मैडम

यात्री बस के ड्राइवर को अमूमन भइया कहते हैं, लेकिन यहां बात कुछ और थी. एक एक करके लोग उतरने लगे और कहने लगे, " थैंक्यू मैडम. "

डीटीसी की पीआरओ आर एस मिन्हाज का कहना है, "महिला ड्राइवर होने की वजह से डीटीसी की छवि भी बदलेगी और आगे अधिक महिला ड्राइवरों की भर्ती के लिए वो और ज़्यादा विज्ञापन निकालेंगे."

सरिता चाहती हैं कि भविष्य में उनको डीटीसी की ओर से मकान की सुविधा मिले और अपनी तनख़्वाह से तेलंगाना में रह रहे अपने परिवार की आर्थिक मदद करे. वो अपने लिए सोने की बालियां लेना चाहती हैं.

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