तेज़ाब के ज़ख़्मों पर लगा प्यार का मरहम

"मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते हैं, समर्थन करते हैं, मेरी इज़्ज़त करते हैं, मुझ पर गर्व करते हैं, मैं बहुत ख़ुश हूँ."

फ़ोन पर अपनी शादी की ख़बर देते हुए सोनाली की आवाज़ में छिपी ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. उत्सुकता से बोलीं, "आपने मेरी शादी की बात तो सुनी होगी."

बारह साल पहले एसिड अटैक का शिकार हुई सोनाली का चेहरा बुरी तरह झुलस गया था, आँखों की रोशनी चली गई थी. सोनाली की उम्र तब सिर्फ़ 17 साल की थी.

सोनाली से मेरी मुलाक़ात दो साल पहले दिल्ली में हुई थी. अपना दर्द उन्होंने तब कुछ यूँ बयां किया था, "मैने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि आप मेरी मदद नहीं कर सकते तो मुझे इच्छामृत्यु दे दीजिए."

आज ख़ुशी ने सोनाली के घर और दिल में बरसों बाद दस्तक दी है. सोनाली कहती हैं कि वो ये ख़्याल भी दिमाग़ से निकाल चुकी थीं कि वो कभी शादी कर पाएंगी.

यूं तो प्रेम कहानियाँ कई देखी, सुनी हैं लेकिन सोनाली की प्रेम कहानी कुछ अलग सी है.

क्यों अलग है ये प्रेम कहानी

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उड़ीसा में इलेक्ट्रीकल इंजीनियर की नौकरी करने वाले चितरंजन तिवारी और सोनाली ने पिछले हफ़्ते कोर्ट में शादी की.

दो साल पहले एक क्राइम टीवी शो में चितरंजन को सोनाली पर हुए एसिड अटैक के बारे में पता चला और उन्होंने सोनाली से संपर्क किया.

सोनाली बताती हैं, "सोशल मीडिया के ज़रिए जान पहचान हुई. एक दिन उन्होंने मुझे फोन किया और बातचीत शुरु हुई. वो अपनी तनख्वाह से आर्थिक मदद भी करने लगे मेरे इलाज के लिए. धीरे-धीरे हम दोस्त बन गए."

फिर एक दिन चितरंजन ने सोनाली को दिल की बात बताई कि वो उनसे शादी करना चाहते हैं. लेकिन सोनाली के लिए किसी पर भरोसा करना आसान नहीं था.

प्यार की राह

एक लंबी साँस भरते हुए सोनाली ने मुझे बताया, "ज़हनी तौर पर मेरे लिए ये मुश्किल था. जब उन्होंने मुझे शादी की बात कही तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ."

ज़िंदगी में कई बार चोट खा चुकी सोनाली हड़बड़ी में कोई फ़ैसला लेना नहीं चाहती थीं.

सोनाली ने कहा, "उन पर भरोसा करने में मुझे बहुत वक़्त लग गया. मुझे समझाने में चितरंजन को बहुत मेहनत करनी पड़ी कि वो औरों से अलग हैं. और वो सच में अलग हैं. तब मैने तय किया कि वो मेरे लिए परफ़ेक्ट हैं."

"वो मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं और हमदर्द भी", ये कहते हुए सोनाली की आवाज़ में मुस्कुराहट साफ़ महसूस की जा सकती है.

'ससुराल वालों को मना लूँगी'

सोनाली के लंबे संघर्ष के बाद बोकारो में उन्हें सरकारी महकमे में क्लर्क की नौकरी मिल गई है. घर में अब शादी की एक छोटी सी पार्टी करने की तैयारी चल रही है.

हनीमून के बारे में पूछा तो सोनाली ने हुँसते हुए कहा," प्लानिंग चल रही है, शायद मुंबई. थोड़ा वक़्त साथ बिताएँगे. अभी तो चितरंजन वापस उड़ीसा चले गए हैं और मैं भी नौकरी पर जाने लगी हूँ."

सोनाली के माँ-बाप के लिए उनकी शादी किसी सपने के सच होने जैसा था. लेकिन सोनाली कहती हैं कि पति के घर में सब ख़ुश नहीं हैं.

सोनाली के बारे में एक बात जिसने मुझे हमेशा प्रभावित किया है, वो है उनका आत्मविश्वास. इसी आत्मविश्वास से वो कहती हैं, "मुझे भरोसा है कि ससुरालवालों का भी मैं भरोसा जीत लूँगी."

कभी इच्छामृत्यु माँगी थी

सोनाली से जब मैं पहली दफ़ा मिली थी तो किसी एसिड अटैक पीड़ित से ये मेरी पहली मुलाक़ात थी.

उस दिन जो मैंने देखा और सुना उसके लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी. न मैं उसके जिस्म के घाव कभी भूल सकी न उसके दिल पर लगे ज़ख़्म.

उसके बाद से कई ऐसी लड़कियों से मिल चुकी हूँ जिन पर तेज़ाब से हमला हुआ. अनु, लक्ष्मी, रानी.....लंबी फ़ेहरिस्त है.

सोनाली की तरह ही पिछले साल लक्ष्मी को भी अपना प्यार मिला. उन्होंने शादी न करके साथ रहने का फ़ैसला किया है.

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी..

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दुश्वारियों के बीच भी जीने की उनकी ललक मुझे हमेशा हैरान कर जाती है.

उनसे मिलने के बाद गुलज़ार का लिखा ये गीत हमेशा याद आता है, "तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं."

पिछले 11 सालों में सोनाली मुखर्जी की 34 सर्जरी हो चुकी है. उनके माँ-बाप ने ज़ेवर, ज़मीन सब बेच दिया.

अभी भी नौ सर्जरी होनी बाकी हैं जिसके लिए लाखों रुपए की ज़रुरत है. सोनाली कहती हैं कि आज भी लड़कियों पर तेज़ाब फ़ेंकने की ख़बरें आती हैं तो उन्हें लगता है कि जैसे वो फिर से झुलस गई हों.

अप्रैल 2003 की एक रात को सोनाली पर तेज़ाब फेंक दिया गया था और वो झुलस गई थीं. 12 साल बाद अप्रैल की ही एक शाम उनकी ज़िंदगी में नई ख़ुशियाँ लेकर आई है.

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