ख़त्म हुई दो महीने की नौटंकी: प्रशांत भूषण

  • 21 अप्रैल 2015
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आम आदमी पार्टी से निकाले जाने पर प्रशांत भूषण ने कहा है कि दो महीने से चल रही नौटंकी ख़त्म होने से वो राहत महसूस कर रहे हैं.

सोमवार को पार्टी की अनुशासन समिति ने योगंद्र यादव, प्रशांत भूषण और दो अन्य नेताओं को निकाल दिया था.

बीबीसी से बातचीत में प्रशांत भूषण ने कहा, “हमारे लिए यह राहत की बात है कि 26 फ़रवरी को शुरू हुई यह नौटंकी ख़त्म हो गई.”

उन्होंने कहा, “हमें पहले पॉलिटिकल अफ़ेयर्स कमेटी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और अब पार्टी से निकाल देने की मुहिम छेड़ी गई थी.”

प्रशांत भूषण कहा, “किस आदर्श के साथ इस पार्टी को बनाया गया था और आज इस पर क़ब्ज़ा किए हुए लोगों ने एक खाप पंचायत की तरह इसे कहां पहुंचा दिया?.”

उन्होंने कहा कि बीते 26 फरवरी को जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग हुई थी, उसी समय केजरीवाल ने चिल्लाकर कहा था इनके साथ काम नहीं किया जा सकता. तभी यह स्पष्ट हो गया था.

'स्वराज अभियान'

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उन्होंने कहा, “ये हमारे निजी मुद्दे नहीं हैं, यह सार्वजनिक हित का मामला है. इसमें लाखों लोगों और वालंटियर्स की भावनाएं और ऊर्जा जुड़ी रही है. लोग एक वैकल्पिक राजनीति के मकसद से निकले थे.”

प्रशांत ने कहा, “मेरी अरविंद को शुभकामनाएं हैं. जितने वादे पूरे कर पाएं, उतनी ही अच्छी बात है. लेकिन अगर वो या उनकी पार्टी कोई ग़लत काम में शामिल होगी तो बाकी पार्टियों की तरह हम उसका विरोध करेंगे.”

हालांकि उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में कोई पार्टी नहीं बनाई जाएगी और स्वराज अभियान को पारदर्शिता के साथ देश भर में चलाया जाएगा और इसके बाद इस बारे में फैसला होगा.

Image caption आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे शांति भूषण.

उधर, आप के प्रमुख संस्थापकों में से एक रहे शांति भूषण ने एक टीवी चैनल से बातचीत में अरविंद केजरीवाल को ‘हिटलर’ बताया है.

योगेंद्र यादव ने भी पार्टी बनाने पर कोई स्पष्ट बात नहीं की लेकिन इसके संकेत ज़रूर दिए हैं.

अपने फ़ेसबुक पन्ने पर एक ताज़ा पोस्ट में उन्होंने हरिवंश राय बच्चन की कविता का ज़िक्र करते हुए ‘नीड़ का निर्माण फिर’ का संकल्प दोहराया है.

उधर, आप नेता नवीन जयहिंद ने बागियों को निकालने जाने को पार्टी का ‘सही क़दम’ कहा है.

योगेंद्र यादव के मुताबिक़, “अनुशासन समिति के रंग-ढंग से जाहिर था किस फैसले की तैयारी हो चुकी था.”

'गुस्सा आता है'

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उन्होंने लिखा है, “सबसे पहले तो गुस्सा आता है: ये कौन होते हैं हमें निकालने वाले? कभी मुद्दई भी खुद जज हो सकते हैं?...लेकिन जो हुआ अच्छे के लिए ही हुआ. घर कोई ईंट-पत्थर से नहीं बनता, रिश्तों से बनता है. हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियाँ गूँज रही हैं: नीड़ का निर्माण फिर…”

पार्टी से निकाले गए एक अन्य नेता प्रोफ़ेसर आनंद कुमार ने एक बयान में कहा, “जिसने भी आम आदमी पार्टी के माध्‍यम से स्‍वराज का सपना देखा था, उनके लिए यह खबर अच्‍छी नहीं है. लेकिन हम स्‍वराज के सपने को जिंदा रखेंगे.”

उन्होंने कहा है, “पार्टी का यह फरमान हमें भ्रष्‍टाचार और भ्रष्‍टाचारियों के ख़िलाफ़ स्‍वराज संवाद व लोक-राजनीति के लिए और ज़िम्‍मेदार तथा सक्रिय बनाएगा. मैं 'स्‍वराज अभियान' की एक पूरी कार्ययोजना 24 अप्रैल को मीडिया के सामने रखूंगा.”

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