'बेघर' योगेंद्र करेंगे नीड़ का निर्माण

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कल देर रात जब आम आदमी पार्टी से योगेंद्र यादव को निकाला गया तो कई टीवी चैनलों ने रात के उसी वक़्त उनसे प्रतिक्रिया जाननी चाही.

योगेंद्र यादव ने अपने दिल की बात फेसबुक पर कुछ यूँ लिखी है:-

कई चैनलों से निपटने के बाद अपने आप से पूछा: तो, आपकी पहली प्रतिक्रिया?

अंदर से साफ़ उत्तर नहीं आया. शायद इसलिए चूंकि ख़बर अप्रत्याशित नहीं थी. पिछले कई दिनों से इशारे साफ़ थे.

जब से 28 तारीख़ की मीटिंग का वाकया हुआ तबसे किसी भी बात से धक्का नहीं लगता.

"अनुशासन समिति" के रंग-ढंग से ज़ाहिर था कि फ़ैसले की तैयारी हो चुकी थी.

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शायद इसलिए फ़ैसला आते ही कई प्रतिक्रियां एक साथ मन में घूमने लगीं.

अगर आपको घसीट कर आपके घर से निकाल दिया जाये (और तिस पर कैमरे लेकर आपसे आपकी प्रतिक्रिया जानने की होड़ हो) तो आपको कैसा लगेगा? बस वैसा की कुछ लगा.

सबसे पहले तो गुस्सा आता है. ये कौन होते हैं हमें निकालने वाले? कभी मुद्दई भी खुद जज बन सकते हैं?

फिर अचानक से दबे पाँव दुःख पकड़ लेता है. घर में वो सब याद आता है जो पीछे छूट गया. इतने खूबसूरत वॉलंटियर, कई साथी जो शायद अब मिलने से भी डरेंगे.

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फिर ममता की बारी है. दिल से दुआ निकलती है: अब जिस का भी कब्जा है वो घर को ठीक से बना कर रखे. जिस उम्मीद को लेकर इतने लोगों ने ये घोंसला बनाया था, उम्मीद कहीं टूट न जाय.

आख़िर में कहीं संकल्प अपना सिर उठाता है. समझाता है, जो हुआ अच्छे के लिए ही हुआ. घर कोई ईंट-पत्थर से नहीं बनता, घर तो रिश्तों से बनता है.

हो सकता है एक दिन हम उन्हें दुआ देंगे जिन्होंने हमें सड़क पर लाकर नया रास्ता दिखा दिया.

हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियाँ गूँज रही थीं: नीड़ का निर्माण फिर...

ये किसी कहानी का दुखांत नहीं है, एक नई, सुन्दर और लंबी यात्रा की शुरुआत है.

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