अबकी बार, बुरी 'फंसी मोदी सरकार'

संसद भवन इमेज कॉपीरइट PTI

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार ने अपने दांव बढ़ा लिए हैं और इस सूरत में संसद के मौजूदा सत्र में लैंड बिल पास कराना नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

इसके साथ-साथ और भी क़ानून हैं, जैसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) बिल और काले धन पर भी सरकार क़ानून पारित कराना चाहती है.

(पढ़ें- जब किसानों ने दिया धरना...)

इनके अलावा भी सरकार एक-दो लंबित विधेयकों को पारित कराना चाहेगी. लेकिन लैंड बिल के मसले पर जितनी मुश्किलें हैं, उतनी दिक़्क़त अन्य क़ानूनों को लेकर नहीं है.

शेखर अय्यर से हुई पूरी बातचीत सुनें.

पढ़ें विस्तार से

इमेज कॉपीरइट PIB

काले धन पर क़ानून पारित कराया जाना है और फाइनेंस बिल भी पास होना है. फाइनेंस बिल के पारित होने के बाद ही बजट से संबंधित औपचारिकताएं पूरी मानी जाती हैं.

(पढ़ें- राष्ट्रपति ने भूमि अध्यादेश पर दस्तखत किए)

लेकिन इन्हें लेकर कोई समस्या नहीं है, मुश्किल केवल लैंड बिल को लेकर है. इस विधेयक को लेकर मैं सरकार के सामने दो तरह की चुनौतियां देख रहा हूं.

सरकार के सामने एक चुनौती तो विपक्ष ने खड़ी कर रखी है कि हम किसी तरह किसी समाधान पर नहीं पहुंचेंगे, कोई समझौता नहीं करेंगे.

दूसरी बात ये है कि बीजेपी के सांसदों में भी ये भावना आ रही है कि लैंड बिल पर इतना दांव बढ़ा तो रहे हैं लेकिन वास्तव में इसका फ़ायदा क्या होगा.

सियासी जोखिम

इमेज कॉपीरइट AP

ये सवाल तो बनता है कि सरकार इस विधेयक को लेकर जितना जोखिम उठाने को तैयार दिखती है, उसे इसकी क्या राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ सकती है.

(पढ़ें- 'मेक इन इंडिया' नहीं 'लूटो इंडिया')

अब बिहार में चुनाव आने वाले हैं, वामपंथी हों, कांग्रेस हो या फिर जनता परिवार, सभी ने इस विधेयक को एक बड़ा हथियार बना लिया है.

वे कह रहे हैं कि ये विधेयक ग़रीब विरोधी है, किसानों के ख़िलाफ़ है, ज़मीन किसानों से लेकर कॉरपोरेट को दे देंगे. ये जो कैम्पेन है, देखना है कि बीजेपी इसका कैसे मुक़ाबला करेगी.

राहुल का सवाल

इमेज कॉपीरइट Reuters

मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में ये मुद्दा फिर से उठा कि क्या पार्टी के सांसद इस मुद्दे को समझ पा रहे हैं, विपक्ष के सवालों का जवाब दे पा रहे हैं.

(पढ़ें- लैंड बिल पर विकल्प तो हैं...)

बीजेपी में एक तबक़े के भीतर भी इस विधेयक को लेकर दुविधा की स्थिति है कि आख़िर इसमें ऐसा क्या है जिसके लिए प्रधानमंत्री इतना ख़तरा उठा रहे हैं.

सोमवार को संसद में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी से पूछा भी कि आप लैंड बिल पर इतना क्यों कर रहे हैं, इससे आपकी छवि ख़राब हो रही है. अगर आप इसे छोड़ दें तो आपको ज़्यादा फ़ायदा होगा.

विरोध अभियान

इमेज कॉपीरइट

इस सूरत में मोदी सरकार लैंड बिल को लेकर सियासी तौर पर फंसती हुई दिख रही है.

क़ानून एक पेचीदा मसला होता है और सरकार इसके सकारात्मक पहलुओं को किस तरह से दिखा पाएगी, वह बड़ी बात होगी.

लैंड बिल को लेकर जो विरोध अभियान चल रहा है, वो बहुत मज़बूत है. इस विरोध में ज़्यादा तर्क नहीं दिए जा रहे हैं.

वो सीधा कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार ग़रीब विरोधी है, अमीरों के साथ है, कॉरपोरेट के साथ है और ज़मीन छीन रही है.

ये विपक्ष का सीधा हमला है और जब ये कैम्पेन गांव गांव बढ़ेगा तो सरकार को इसकी राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ सकती है.

(बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार