जहाँ मिली राहुल को 'आग जैसी ताक़त'

  • 24 अप्रैल 2015
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पैदल चलकर केदार नाथ मंदिर पहुँचे राहुल गाँधी ने कहा है कि यहाँ आकर मुझे आग जैसी शक्ति मिली है.

राहुल गाँधी ने कहा, "मैं मंदिर में गया, मैंने कुछ मांगा नहीं, लेकिन जब मैं मंदिर के भीतर गया तो मुझे आग जैसी शक्ति मिली."

राहुल गाँधी ने पिछले साल आई आपदा के दौरान काम करने वाले अधिकारियों के काम की भी तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, "जब ये आपदा आई तो जो यहाँ अफ़सर काम करते हैं, जिन्होंने अपना ख़ून पसीना दिया, उनके बारे में काफ़ी नकारात्मक बातें कही गईं लेकिन आपदा आने के बाद से अफ़सरों ने, सेना ने, पुलिसवालों ने बहुत अच्छा काम किया है."

राहुल गाँधी ने सरकार के काम की तारीफ़ करते हुए कहा, "सड़कें बहुत अच्छी बनी हैं, आपात स्थिति में लोगों को निकालने के लिए बनाए गए हेलीपैड भी अच्छा विचार हैं."

उत्तराखंड में दो साल पहले केदारनाथ में आई भीषण आपदा के बावजूद इस साल की चार धाम यात्रा में भी श्रद्धालु बिना किसी भय के यहां जाने के लिये लालायित हैं.

एक लेकिन इस बार में वहां डेढ़ हज़ार से ज़्यादा तीर्थयात्री नहीं रह सकेंगे. केदारनाथ से नीचे सबसे पहले पड़ाव लिंचौली में तीन हज़ार लोगों के रुकने की व्यवस्था है.

'कोई डर नहीं'

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Image caption तीर्थयात्री कालिरिमाल कहती हैं कोई डर नहीं आमी खुशी आछे.

दिल्ली से आई 26 वर्षीय सीमा कहती हैं, “बचपन से आती रही हूं. यहां आना अच्छा लगता है. त्रासदी के बाद यहां काफ़ी इंप्रूवमेंट हुआ है. मैं कहना चाहूंगी कि लोग डरें नहीं और यहां आते रहें.”

कालीरिमाल बांग्ला मिश्रित हिंदी में कहती हैं, “बद्री- केदार जा रही हूं, गांव से आया हूं. कोई डर नहीं आमी खुशी आछे.”

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Image caption केदारनाथ की यात्रा पर राहुल गांधी.

नेपाल से 26 तीर्थयात्रियों को लेकर आए राजेश गौतम का कहना है, “चारों धाम की यात्रा करना है. बदरी-केदार का नाम लेकर हम जा रहे हैं. आगला साल भी आया था लेकिन गुप्तकाशी के आगे जीप नहीं गई. इस बार बुढ्ढा-बुढ्ढी सबको समझाया कि थोड़ा-बहुत बारिश तो होती ही रहती है, जगह ही ऐसी है.”

इस बीच केदारनाथ यात्रा की शुरुआत को सुर्खी बनाने में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी पीछे नहीं रहे. वो पैदल रास्ते से केदारनाथ जाएंगें.

बारिश और ख़राब मौसम

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Image caption केदारनाथ के यात्री राजेश गौतम.

हालांकि केदारनाथ सहित, गढ़वाल के चारों धामों में बर्फ़बारी, रुक रुक कर हो रही बारिश और ख़राब मौसम के बीच सड़क मार्ग को सुचारू रखना और रहन-सहन की व्यवस्थाओं को मुस्तैद रखना सरकार के लिये टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

केदारनाथ के रास्ते पर चारधाम मार्ग पर पिछले 20 वर्षों से गाड़ी चलाते रहे ड्राइवर संजय कांडपाल दो दिन पहले केदारनाथ के रास्ते से लौटे हैं. वो कहते हैं, “रास्ते अभी भी कमज़ोर हैं, सरकार भले ही कुछ भी कहे कई जगह सड़कें बनी नहीं हैं. ख़तरा बना हुआ है.”

रास्ते में बर्फ़

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Image caption नेपाली तीर्थयात्री केदारनाथ की यात्रा पर.

बदरीनाथ के कपाट 26 अप्रैल को खुल रहे हैं. बदरीनाथ के रास्ते में विष्णुप्रयाग और कंचनगंगा में हाईवे पर इतनी ज़्यादा बर्फ़ है कि बताया जा रहा है उसे खोलने में दो दिन लगेंगे. लेकिन इस सबसे बेफ़िक्र, यात्री वहां पंहुचने लगे हैं.

मंदिर के धर्माधिकारी भुवन उनियाल का कहना है कि मंदिर के द्वार पर ही 4-5 फुट बर्फ़ जमी हुई है.

मौसम विभाग के अनुसार अगले हफ़्ते फिर मौसम बिगड़ने के आसार हैं. उत्तराखंड के मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा ने बताया कि, “पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हिमालय की ऊंची चोटियों में बारिश की संभावना है.”

जून, 2013 में केदारनाथ में आई प्रलयंकारी बाढ़ और बारिश में 5000 से ज़्यादा लोग मारे गये थे.

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