नेपाल के भूकंप से टूटा बिहार का सपना

  • 27 अप्रैल 2015
भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम

नेपाल में आए भूकंप ने न केवल जानमाल की बर्बादी की बल्कि कुछ लोगों के सपने भी चकनाचूर कर डाले.

अंडर-14 भारतीय महिला फ़ुटबाल टीम शनिवार को तीसरे स्थान के लिए ईरान के ख़िलाफ़ होने वाले मैच खेलने के लिए काठमांडू गई थी.

लेकिन भूकंप की वजह से उनका मैच ड्रॉ हो गया और उनके देश, राज्य और शहर का नाम रोशन करने का सपना भी ख़त्म हो गया.

गरीबी और संसाधनों की तंग गलियों से सीना तान कर निकल जाने वाली अंडर-14 भारतीय फ़ुटबाल टीम की कप्तान सोनी कुमारी काठमांडू से आज सुबह पटना पहुंचीं.

सोनी का चयन भारतीय कैंप में हुआ था और उन्हें प्रशिक्षण के लिए गुजरात भेजा गया जहां उन्हें टीम का कप्तान चुना गया.

उन्होंने बताया, "हमने ख़ूब मेहनत की थी. तीसरे स्थान के लिए शनिवार को हमारा मैच ईरान से था. हम सब दशरथ स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में मौजूद थे. वहां भूकंप का पहला झटका आ चुका था. हम सब काफ़ी डर गए थे और रो रहे थे. हमारा मैच भी ड्रॉ हो गया."

बिहार के छोटे से शहर नरकटियागंज की रहने वाली कक्षा नौवीं की छात्रा सोनी के पिता तांगा चलाकर अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं.

अनदेखी क्यों

बिहार की राजधानी पटना में खेल और खिलाड़ी एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार हुआ.

पटना एयरपोर्ट पर पहुंची इस टीम के सदस्यों का स्वागत करने के लिए राज्य सरकार का कोई भी मुलाज़िम उपस्थित नहीं था और न ही मीडिया ने उसकी सुध लेने में कोई रुचि दिखाई.

सीवान की रहने वाली टीम की दूसरी सदस्य निशा कुमारी कहती हैं कि टीम 18 अप्रैल को काठमांडू के लिए रवाना हुई थी. वह बताती हैं, ''मैच एक बजे से शुरू होने वाला था. हम सब ड्रेसिंग रूम में थे तभी भूकंप आ गया. मैडम के कहने पर हम ग्राउंड में चले गए. बहुत भयंकर स्थिति थी और सभी डरे हुए थे."

अफसोस जताते हुए निशा कहती है कि उनलोगों का सपना पूरा नहीं हुआ.

एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए उनके कोच सुनील वर्मा, संजय पाठक और बिहार फ़ुटबॉल एसोसिएशन के सचिव सैय्यद इम्तियाज़ हुसैन मौजूद थे.

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