श्रीनगर की दीवारों पर दिखेंगी कश्मीरी संस्कृति

  • 8 मई 2015
कश्मीर दीवारों पर पेंटिंग इमेज कॉपीरइट Durdana Bhat

कश्मीर की परंपरा को बचाने और उसके बारे में बताने के लिए श्रीनगर नगर निगम ने अनूठी पहल की है. शहर की दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से संस्कृति को दर्शाया जाएगा.

एसएमसी के आयुक्त तुफ़ैल मट्टू कहते हैं कि मंशा अपनी भुला दी गई संस्कृति को चित्रित करने की है. यह एक बड़ी परियोजना है और जिसमें पूरे श्रीनगर में कई जगहों पर भित्तिचित्र बनाए जाएंगे.

इसके लिए कश्मीर के जाने-माने कलाकार मसूद हुसैन को परियोजना में शामिल किया गया है. उनके नेतृत्व में युवा कलाकार की टीम भित्तिचित्र बना रही है.

'सच छुपाने की कोशिश'

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मसूद कहते हैं कि कश्मीर की संस्कृति को दीवारों पर दिखाकर रास्तों को ख़ूबसूरत बनाने का विचार है. उन्होंने इसके लिए श्रीनगर इंस्टीट्यूट ऑफ़ म्यूज़िक एंड फ़ाइन आर्ट्स के सात विद्यार्थियों को नियुक्त किया है.

अभी इसकी शुरूआत एयरपोर्ट रोड में हैदरपुरा फ़्लाइओवर की दीवारों से की गई है. घाटी को आनेवाले हर पर्यटक को इस सड़क से गुज़रना होता है.

लेकिन मसूद कहते हैं कि पूरी योजना सिर्फ़ इस इलाक़े तक महदूद नहीं है बल्कि वह झेलम नदी के किनारों और शहर के व्यापारिक केंद्र के अंदर और आस-पास भी पेंटिंग बनाएंगे.

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भले ही दीवारों पर उकेरी गई पेंटिंग्स शहर की ख़ूबसूरती बढ़ा सकती हैं और पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि एसएमसी का प्लान शहर की दीवारों पर लिखी इबारतों को मिटाने की कोशिश है.

पिछले कुछ सालों से श्रीनगर के कुछ भागों में दीवारों पर नारें लिखे नज़र आने लगे हैं जिनमें अक़्सर भारत विरोधी और आज़ादी-समर्थक संदेश होते हैं. इसमें पिछले पांच सालों में ज़्यादा तेज़ी आई है.

नाम न बताने की शर्त पर एक भित्ति-चित्रकार ने कहा कि दीवारों पर पेंटिग्स या चित्रकारी सिर्फ़ कश्मीरियों के आवाज़ को दबाने की कोशिश है.

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उन्होंने कहा, "हम दीवारों पर जो लिखते हैं वह कठोर सत्य है और सरकार नहीं चाहती पर्यटक वह देखें. दीवारों पर ख़ूबसूरत तस्वीरें बनाकर वह इसके पीछे छुपे कड़वे सच को छुपाना चाहते हैं."

'नाकाम होगी प्रक्रिया'

श्रीनगर के एक और भित्ति-चित्रकार कहते हैं कि भारत के लोकतांत्रिक देश होने के दावे की तब हवा निकल जाती है जब वह सच्चाई की आवाज़ को दीवारों से मिटा देता है.

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वह कहते हैं, "वह हर तरीके़ से हमारी राजनीतिक आज़ादी छीन रहे हैं. चाहे यह राजनीतिक रैलियों को रोकना हो या फिर दीवारों पर लिखे को मिटाना, भारत विरोध को कतई बर्दाश्त नहीं कर पाता."

कश्मीर विश्वविद्यालय के कानून विभाग में प्रोफ़ेसर और इतिहासकार डॉक्टर शेख शौकत कहते हैं कि शहर की दीवारों पर पेंटिंग करना एक ऐसी अनवरत प्रक्रिया है जो अंततः नाकाम हो जाती है.

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वह कहते हैं, "आज वह दीवारों पर पेंटिंग कर सकते हैं लेकिन कल को उनके ऊपर कुछ लिख दिया जाएगा जो मुख्यतः युवाओं की और सामान्यतः आम जनता की भारत-विरोधी और आज़ादी समर्थक भावनाएं होंगी."

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