75 साल की बड़ी ख़बरों के 15 चुनिंदा बीबीसी ऑडियो

  • 11 मई 2015
बीबीसी हिन्दी सेवा के पुराने प्रस्तोता

बीबीसी हिंदी की कहानी शुरू हुई थी आज से ठीक 75 साल पहले.

ये सफ़र शुरू हुआ था 11 मई 1940 को, जब दूसरे विश्व युद्ध में लड़ने वाले हिंदुस्तानी जवानों के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया था जिसके ज़रिए वो अपने घरों को संदेश प्रसारित करते थे.

(आप भी सुनिए- बीबीसी का पहला हिंदी प्रसारण)

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अभी हिंदी प्रसारण को शुरू हुए कुछ ही महीने हुए थे कि ब्रॉडकॉस्टिंग हाउस पर जर्मन विमानों ने हमला किया. उस समय ब्रूस वेलाव्रिज अंग्रेज़ी में समाचार पढ़ रहे थे. इस हमले में सात लोग मारे गए थे लेकिन प्रसारण नहीं रुका.

(आप भी सुनिए- बीबीसी के दफ़्तर पर हमला)

14 अगस्त 1947 को आधी रात भारत स्वाधीन हुआ. इस मौके पर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रीय एसेम्बली को संबोधित करते हुए नए देश की चुनौतियों और सपनों के बारे में बताया.

(आप भी सुनिए- नेहरू का भाषण ट्रिस्ट विद डेस्टनी)

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अभी भारत को आज़ाद हुए मात्र पांच महीने हुए थे कि जैसे वज्रपात हुआ. 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बि़ड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गोली मार दी. बीबीसी संवाददाता रॉबर्ट स्टिमसन वहां मौजूद थे.

(आप भी सुनिए- महात्मा गांधी की हत्या की रिपोर्ट)

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तत्कालीन प्रधानमंत्री और जवाहरलाल नेहरू ने रुंधे गले से महात्मा गांधी के निधन की सूचना पूरे राष्ट्र को दी.

(आप भी सुनिए- नेहरू का शोक संदेश)

भारत के विभाजन के बाद बीबीसी की हिंदुस्तानी सर्विस का भी विभाजन हुआ. जनवरी 1949 में इंडियन सेक्शन ने पहली बार हिंदी में प्रसारण शुरू किए जिसका उद्घाटन किया ब्रिटेन में भारत के तत्कालीन उच्चायुक्त और बाद में रक्षा मंत्री बने कृष्णा मेनन ने.

(बीबीसी की हिंदुस्तानी सेवा का उद्घाटन)

बीबीसी हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान. ये शायद पहली बार हुआ कि किसी प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित कर सीमा पर हो रही हार को सरेआम स्वीकार किया.

(सुनें- नेहरू ने स्वीकार की चीन से हार)

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तीन वर्ष बाद वर्ष 1965 में भारत को एक बार फिर युद्ध के मैदान में उतरना पड़ा. पाकिस्तान के राष्ट्रपति फ़ील्ड मार्शल अयूब ख़ान ने पाकिस्तानी जनता को संबोधित करते हुए युद्ध का एलान किया.

(सुनें- पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान का ऐलान)

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10 जनवरी 1966 को ताशकंद के भारत और पाकिस्तान ने एक समझौते पर दस्तख़त किए. उसी रात ताशकंद में ही भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया. मशहूर पत्रकार कुलदीप नैयर उस समय ताशकंद में मौजूद थे.

(सुनें-लाल बहादुर शास्त्री का निधन)

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1969 में इंसान का एक और सपना पूरा हुआ और वो धरती से ढ़ाई लाख मील दूर चांद पर जा पहुंचा. चांद पर इंसान के पहुंचने पर बीबीसी ने हिंदी में ख़ास कार्यक्रम पेश किया.

(सुनें- इंसानों के चंद्रमा पर पहुंचने पर बीबीसी हिंदी का ख़ास कार्यक्रम)

1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध को जिस तरह से बीबीसी हिंदी ने कवर किया, उसकी हर जगह तारीफ़ हुई. बांग्लादेश की आज़ादी पर रत्नाकर भारतीय ने विशेष प्रस्तुति के जरिए पेश किया.

(सुनें- किस तरह आज़ाद हुआ बांग्लादेश?)

26 जून 1975 को तमाम लोकतांत्रिक मूल्यों को धता बताते हुए इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की. विपक्ष के नेताओं पर मीडिया से बात करने पर प्रतिबंध के बावजूद बीमारी के कारण जेल से रिहा किए गए जयप्रकाश नारायण ने सबसे पहले बात की.

(सुनें- आपातकाल लगाए जाने के बाद जेपी का पहला इंटरव्यू)

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भारत का सरकारी मीडिया एक तरह से सरकार का लाउडस्पीकर बनकर रह गया था. प्रेस की सेंसरशिप ने भारत में बीबीसी की उपयोगिता और बढ़ा दी थी. संभवत: बीबीसी हिंदी का ये स्वर्णिम काल था. बाद में भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, अन्य विपक्षी नेताओं की तरह जेल में बंद थे.

(सुनें- आपातकाल के दौरान बीबीसी को लेकर क्या सोचते थे भारतीय नेता?)

1984 में भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर में घुसकर सिख पृथकतावादियों को निकालने की मुहिम चलाई. ऑपरेशन ब्लू स्टार तो सफल रहा लेकिन उसकी बहुत बड़ी राजनीतिक क़ीमत तत्कालीन सरकार को चुकानी पड़ी.

31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी की अपने अंगरक्षकों ने उन पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी. कम के कम भारत के लोगों को उसकी सबसे पहली ख़बर बीबीसी ने दी.

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उस समय दिल्ली में बीबीसी के संवाददाता थे सतीश जैकब. उस दिन बीबीसी हिंदी के आजकल कार्यक्रम की शुरुआत कुछ इस तरह हुई.

(सुनें- नहीं रहीं इंदिरा गांधी, बीबीसी ने दी दुनिया को ख़बर)

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1991 में जब राजीव गांधी दोबारा सत्ता में आने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे थे, श्रीपेरंबदूर में तमिल पृथकतावादियों ने आत्मघाती बम हमले के ज़रिए उनकी हत्या कर दी.

(सुनें- राजीव गांधी की बम विस्फोट में हत्या)

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