वो हाथ काटने वालों की सज़ा से ख़ुश नहीं..

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Image caption सज़ा सुनाए जाने के बाद अदालत से निकलते हुए दोषी

केरल में कोच्चि की एक अदालत ने एक प्रोफ़ेसर टीजे जोसेफ़ के हाथ काटने के जुर्म में दस लोगों को आठ साल और तीन को दो साल की जेल की सज़ा सुनाई है.

लेकिन प्रोफ़ेसर जोसेफ़ इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं. वो दरअसल इन लोगों को सज़ा देने के ख़िलाफ़ हैं.

प्रोफ़ेसर जोसेफ़ थोडुपुज़्ज़ा के न्यूमैन कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे. वो तब सुर्ख़ियों में आए, जब 04 जुलाई 2010 को कुछ लोगों ने उन पर हमला किया और उनका हाथ काट दिया गया.

दरअसल कुछ लोगों को प्रोफ़ेसर जोसेफ़ का बनाया गया एक प्रश्न पत्र ईशनिंदक लगा और इसीलिए उन्हें निशाना बनाया गया.

प्रोफ़ेसर जोसेफ़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''मैंने उन्हें माफ़ कर दिया है. मेरे मन में उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं है और उनके ख़िलाफ़ मामला होने के बावजूद मैंने उन्हें छोड़ दिया है. कोर्ट के फ़ैसले से मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है. और सच्चाई ये कि इस मामले में अभियुक्तों को जो सज़ा मिली है उससे मैं ख़ुश नहीं हूं.''

इस मामले में 32 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था. कोच्चि की कोर्ट ने इस मामले में 13 लोगों को सज़ा सुनाई, 18 को बरी कर दिया है और तीन लोग फ़रार हैं.

मुश्किल समय

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प्रोफ़सर जोसेफ़ ने प्रश्नपत्र में एक प्रसिद्ध फिल्म निदेशक और कभी सीपीएम के विधायक रहे पीटी कुन्जु मोहम्मद की मलयालम में लिखी गई किताब का संदर्भ दिया था.

इस किताब में एक दृश्य है जिसमें मानसिक रूप से विक्षिप्त एक व्यक्ति सड़क पर भगवान से मिलता है और उनसे बातचीत करता है. प्रोफ़सर ने इस व्यक्ति को लेखक का नाम मोहम्मद दे दिया था.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एमजी राधाकृष्णण कहते है, ''ये मामला इसलिए नाटकीय हो गया क्योंकि केरल में कभी इस तरह की हिंसा नहीं हुई है. और ये एक तरह से इस बात को भी दर्शाता है कि राज्य में रुढ़िवादी सोच बढ़ रही है.''

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प्रोफ़ेसर जोसेफ़ और उनके परिवार के लिए पांच साल बहुत ही परेशानी और संघर्षपूर्ण रहे हैं.

वो कहते हैं कि इस घटना के बाद सरकार और किसी ने उनका साथ नहीं दिया.

जब परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था तो उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी. उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद ही अपनी नौकरी वापस मिली.

अदालत ने दोषियों को दंड के तौर पर प्रोफ़ेसर को आठ लाख रुपए का देने का भी आदेश दिया है.

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