बाल विवाह के विरोध पर 16 लाख का जुर्माना

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Image caption संतादेवी (दांएं) अपना बालविवाह कानूनी रूप से खत्म करवाना चाहती हैं.

जोधपुर की 19 वर्षीय संतादेवी मेघवाल ने अपना बाल विवाह मानने से इंकार कर दिया है.

इससे गांव की पंचायत नाराज़ हो गई है. पंचायत ने न केवल उनके परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया है बल्कि 16 लाख का जुर्माना भी लगाया है.

महज 11 महीने उम्र में परिवार के किसी बुज़ुर्ग के मौसर (मृत्यु भोज) पर संतादेवी का बाल विवाह कर दिया गया था.

संतादेवी ने अपने विवाह को कानूनी रूप से निरस्त करवाने के लिए जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय में अर्ज़ी लगाने का निश्चय किया है.

अमानवीय यातनाएं

बाल विवाह को कानूनन रद्द करवाने के फैसले के विरुद्ध उनके गाँव रोहिचा कलां और ससुराल रोहिचा खुर्द की जाति पंचायत ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया है और 16 लाख रुपये का जुर्माना थोपा है.

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अब संतादेवी बीए दूसरे द्वितीय वर्ष की छात्रा है और पढ़ाई पूरी कर “टीचर” बनने का सपना रखती हैं.

संता ने बीबीसी को बताया कि उनके कथित तौर पर पति दसवीं पास हैं और “गौना” करने से इंकार करने के कारण उनका पीछा कर रहे हैं.

संता बताती हैं, “मेरी बहन का बाल विवाह भी इसी गाँव में हुआ था और उसे अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ीं. मैं नहीं चाहती कि मेरे साथ भी ऐसा कुछ हो. पहले तो हिम्मत नहीं हुई थी पर सारथी ट्रस्ट की मदद से हौसला मिला है.”

समाज कल्याण संस्था सारथी राजस्थान में अब तक 27 बाल विवाह कानूनन रद्द् करवाने में मदद कर चुकी है.

बालविवाह 'रद्द'

संस्था की प्रमुख, कृति भारती ने बीबीसी को बताया कि बाल विवाह निषेध कानून 2006 के तहत बाल विवाह 'रद्द' (वोइडेबेल) माना जाता है.

कोई भी लड़की 18 साल और लड़का 21 वर्ष का होने के दो साल के भीतर यदि चाहे तो अदालत में अपने विवाह को रद्द करने की अर्ज़ी लगा सकता है.

आपसी सहमति के आधार पर ऐसी अर्ज़ी पर फैसला तीन दिन में भी हो सकता है. वरना इसके निपटारे में समय ज़्यादा भी लग सकता है.

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