राजनीति मेरे बस की नहीं: किरण बेदी

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रिटार्यड पुलिस अधिकारी किरण बेदी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए वो सड़क पर उतर कर प्रदर्शन नहीं कर सकती हैं.

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था.

हालांकि इस चुनाव में पार्टी हार गई और किरण बेदी फिर अपनी सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका में लौट आई हैं.

बीबीसी से खास बातचीत में उनका कहना था कि राजनीति उनके खून में नहीं है और ना ही वो राजनीति कर सकेंगी.

दिल्ली के चुनाव के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति लगभग न के बराबर ही देखी गई है.

मोदी से खुश

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हालांकि किरण बेदी का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों से वो बहुत खुश हैं.

उन्होंने जीएसटी और भूमि अधिग्रहण बिल की वक़ालत की और इन्हें देश को आगे बढ़ाने वाला विधेयक बताया.

उनका कहना है कि अगर फिर से पार्टी उन्हें कोई ज़िम्मेदारी देती है तो वो इस बात को देखेंगी कि उस भूमिका में वो फिट हैं. अगर नहीं तो साफ़ मना कर देंगी.

दिल्ली में सीएम की उम्मीदवारी को लेकर उन्होंने कहा, “मुझे उन्होंने (बीजेपी) हरवाने के लिए नहीं बुलाया था, बल्कि एक नई ऊर्जा लाने के लिए बुलाया था. लेकिन समय बहुत कम था. इसके बावजूद मेरे जैसे एक बाहरी व्यक्ति के प्रति जो उन्होंने भरोसे जताया, मैं उसकी बहुत कद्र करती हूँ.”

आंखें खुल गईं...

भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शनों और कार्यक्रमों में दिखाई न देने के सवाल पर वो कहती हैं, “सामाजिक कार्य, शिक्षा और प्रशिक्षण समेत कई क्षेत्रों में मैं काम कर रही हूँ. लेकिन अगर आप सोचो कि मैं जंतर मंतर पर जाकर हाय हाय करूंगी तो ये मैं नहीं कर सकती.”

किरण बेदी का कहना है कि, “अगर कोई नीति मेरी समझ में सही नहीं है तो मैं उसे कभी समर्थन नहीं कर सकती.”

अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही मिले राजनीतिक झटके के बारे में वो बताती हैं, “उन तीन हफ़्तों में मेरी आंखें खुली हैं. मैंने देखा कि वोट बैंक की राजनीति हर कोई करता है. शायद इसीलिए राजनीति मुझे पसंद नहीं है, ना ही मेरे बस की है और ना ही करनी है.”

(बीबीसी हिंदी रेडियो एडिटर राजेश जोशी की किरण बेदी से बातचीत के आधार पर)

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