अबकी आम तो आम, गुठलियों के भी दाम

  • 14 मई 2015
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शायर अकबर इलाहाबादी ने कभी कहा था, “नाम न कोई यार को पैग़ाम भेजिए, इस फ़सल में जो भेजिए, बस आम भेजिए.”

मगर न अब ऐसे यार हैं जो पैगाम भेजें, न ही इस बार ऐसी फसल हुई कि कोई आम भेज सकें.

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बेमौसम बारिश और तूफ़ान ने अन्य फ़सलों के साथ फलों के राजा आम के बाज़ार को भी थोड़ा खट्टा कर दिया है.

जो लोग गर्मी के साथ आम का इंतज़ार करते हैं, उनके लिए यह निराशाजनक तो है ही, जो किसान इसकी पैदावार में लगे हैं, उनके चेहरे भी इस बार मुरझाए हुए हैं.

दिल्ली से लगे मेरठ के पास के किसान हाजी मंज़ूर हुसैन के अनुसार, “इस बार आम की पैदावार ज़्यादा खुशगवार नहीं है. इस बार की बारिश में आम के बौर झड़ गए और आंधी भी बहुत आई और ठण्ड भी ज़्यादा समय तक रही. इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ा है.”

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दिल्ली की सबसे बड़ी मंडी आज़ादपुर में आम की दुकान लगाने वाले रमेश कहते हैं, “कम पैदावार के कारण आम की क़ीमतें के भी ऊंचे रहने की संभावना है.”

रमेश के अनुसार, इस बार मंडी में आम के दामों में 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो सकती है.

हालांकि इस फल के चाहने वालों के लिए यह साल भर में एक मौके जैसा होता है.

भारत में आमों की इतनी क़िस्म है कि हर व्यक्ति की अपनी अलग ही पसंद है.

रमेश के अनुसार, “अल्फांसो एक इकलौता ऐसा आम है, जो दर्जन के हिसाब से मिलता और बारह आम डिब्बे की क़ीमत आम तौर पर पांच सौ से लेकर हज़ार रुपए तक होती है.”

आमों की कई प्रकार हैं और उनके स्वाद भी अलग अलग हैं.

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