किसानों को ज़मीन वापस नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नोएडा एक्सटेंशन में बने अपार्टमेंट

नोएडा एक्सटेंशन के लिए ज़मीन अधिग्रहण को रद्द करने की मांग करने वाली किसानों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है.

नोएडा के क़रीब 65 गांवों के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अधिग्रहण को रद्द करने की मांग की थी.

उनकी दलील थी कि औद्योगिक विकास के लिए ज़मीन ली गई थी. लेकिन जमीन को बिल्डरों को बेच दिया गया. इसलिए अधिग्रहण रद्द कर उनकी जमीन उन्हें वापस की जाए.

बढ़ा मुआवज़ा

सुप्रीम कोर्ट ने उनका याचिका रद्द करते हुए किसानों को साढ़े आठ सौ रुपए प्रति गज की दर से मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाकर 14 सौ रुपए प्रति गज कर दिया. इसके अलावा विकसित जमीन का 10 फ़ीसद हिस्सा किसानों को दिया जाएगा.

Image caption इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2011 में नोएडा एक्सटेंशन के तीन गांवों का जमीन अधिग्रहण को रद्द किया था.

किसानों की याचिका रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब जब नोएडा एक्सटेंशन में बड़ी-बड़ी इमारतें बन चुकी हैं और एक तीसरा पक्ष भी उसमें शामिल हो चुका है, ऐसे में ज़मीन किसानों को वापस नहीं की जा सकती है.

इस फैसले से नोएडा एक्सटेंशन में घर खरीदने वाले लोगों को राहत मिली है.

फ़ैसला आने के बाद किसान संघर्ष समिति के दुष्यंत नागर ने टीवी चैनल एनडीटीवी इंडिया को बताया कि इस फ़ैसले के खिलाफ बड़ी बेंच में अपील की जाएगी.

इसके पहले अक्तूबर 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के गांव देवला, शाहबेरी और असदुल्लापुर में हुए जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया था.

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