पाक-चीन दोस्ती का भारत के पास है जवाब?

  • 15 मई 2015
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ईरान के एक बंदरगाह में अपने लिए नए व्यापार मार्ग खोलने की भारत की परियोजना को क्षेत्रीय मीडिया भारत और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के रूप में देख रहा है.

ईरान के दक्षिणपूर्वी बंदरगाह चाबहार में भारत 8.52 करोड़ डॉलर का निवेश कर रहा है. ये वो जगह है जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से सिर्फ़ 72 किलोमीटर दूर है, जहां चीन ने 62.2 करोड़ डॉलर निवेश का वादा किया है.

चीन का ग्वादर बंदरगाह में निवेश दरअसल 46 अरब डॉलर वाले पाकिस्तान-चीन इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है.

नए व्यापार मार्ग

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भारत और ईरान के मीडिया ने चाबहार पोर्ट क़रार को "अहम" बताते हुए कहा है कि इससे पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफ़ग़ानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप के लिए नए व्यापार मार्ग खुलेंगे.

भारत चाबहार बंदरगाह को अफ़गानिस्तान में पहले से बनी 220 किलोमीटर की जारांज-डेलाराम सड़क से जोड़ेगा, जिसका ज़िक्र भारत के एक अख़बार 'दि हिंदू' के 7 मई के अंक में था. इसके ज़रिए भारतीय कंपनियां इस नए मार्ग से सामान भेज सकेंगी.

हालाँकि पाकिस्तानी अख़बारों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान में चीन के निवेश की वजह से भारत ने यह क़दम उठाया है.

शुरुआत में चीन के मीडिया ने इस मसले पर चुप्पी साधे रखी. लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि भारत को ग्वादर समझौते से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि चीन का ज़ोर आर्थिक प्रगति पर है न कि ग्वादर बंदरगाह में फ़ौज तैनात करने पर.

चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा

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चीन, भारत और पाकिस्तान की मीडिया ने ग्वादर पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि ग्वादर चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल का अहम हिस्सा है जिससे वह मध्य एशिया और इससे अलग उन बाजारों से भी जुड़ सकेगा, जहां भारत नई आर्थिक संभावनाएं तलाशने में दिलचस्पी ले रहा है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ग्वादर एक ऐसी अहम कड़ी है जो चीन के शिनज़ियांग को अरब सागर से जोड़ती है जिससे अफ़्रीका और मध्य पूर्व के लिए एक छोटा मार्ग तैयार करने में मदद मिलेगी.

हालाँकि कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा से भारत खुश नहीं है.

भारत के एक हिंदी अख़बार दैनिक जागरण ने भारत के चाबहार क़रार को हिंद महासागर में चीन के बढ़ते अतिक्रमण का एक 'उपयुक्त जवाब' बताया.

भारतीय कूटनीति

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इंडियन एक्सप्रेस में भारतीय राजनयिक और विश्लेषक विवेक काटजू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सलाह दी कि वह अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान पाकिस्तान-चीन के बढ़ते रिश्तों को नज़रअंदाज़ न करें.

लेख में यह भी कहा गया कि भारत की तात्कालिक कोशिश यह सुनिश्चित करने की होनी चाहिए कि ईरान में चाबहार पोर्ट का विकास नए उद्देश्यों के लिए हो.

हिंदी अख़बार नवभारत टाइम्स के मुताबिक़ भारत के लिए यह आर्थिक कूटनीति लंबे समय में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए उपयोगी होगी.

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