अपने बच्चों की उंगली क्यों जला रहे हैं लोग?

  • 20 मई 2015
जमोगा के डर के साये में महिलाएं इमेज कॉपीरइट ATUL CHANDRA

रायबरेली के महाराजगंज ब्लॉक के जिह्वा गाँव में जमोगा नाम की 'बुरी शक्ति' का भय फैला हुआ है.

अंधविश्वास की उपज जमोगा का डर इतना ज़्यादा है कि जिस घर में साल भर से कम उम्र के बच्चे हैं वहाँ लोग जमोगा कहने से भी कतराते हैं. रमा देवी कहती हैं, "हो सकता है यहीं हो और अपना नाम सुन कर आए जाए."

गाँव की महिलाओं का मानना है कि जमोगा उनके बच्चों की जान ले लेता है.

जमोगा से बचाने के लिए जिह्वा गाँव में माएँ अपने बच्चों की सबसे छोटी उंगली खौलते तेल में डुबो देती हैं. उनका विश्वास है कि खौलते तेल में उंगली जलाना बच्चे के लिए रक्षा कवच का काम करता है.

ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एलबी सिंह का कहना है, "उन्हें लोगों के इस अंधविश्वास के बारे में पता नहीं है. लेकिन वो इस बारे में एक जनजागरण अभियान शुरू करेंगे."

क्या है जमोगा

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Image caption रमा देवी अपनी बेटी शिवपूजन की उंगली दिखाते हुए.

32 वर्षीय रमा देवी ने अपनी दुधमुंही बच्ची शिवपूजन की सबसे छोटी उंगली गरम तेल में उस समय डाल दी थी जब वो सिर्फ डेढ़ महीने की थी.

रमा देवी के दिमाग में जमोगा का डर इस क़दर है कि जब उनकी बेटी छह महीने की हुई तो उसके दूसरे हाथ की सबसे छोटी उंगली भी खौलते तेल में डाल दी.

पहली उंगली का घाव तो भर गया है, लेकिन दूसरी का घाव अभी भी भरा नहीं है.

शिवपूजन रमादेवी की तेरहवीं संतान है. पहले के बारह बच्चे अलग-अलग कारणों से मर चुके हैं इसलिए वो इस बच्ची को बचाने के लिए, विशेषकर जमोगा से, हर संभव प्रयत्न कर रही हैं.

उनका विश्वास है कि अब जमोगा शिवपूजन पर अपनी बुरी नज़र नहीं डालेगा.

'उंगली गल कर अलग हो गई'

दस साल की कांति शिवपूजन की तरह खुशकिस्मत नहीं हैं. पैदा होने के कुछ महीनों के बाद जब उसकी उंगली खौलते तेल में डालने की कोशिश की गई तो उसने मुट्ठी नहीं खोली.

नतीजा ये हुआ कि उसकी सबसे छोटी उंगली गल कर अलग हो गई. गाँव की औरतों ने बताया कि जिस वक़्त उसका हाथ तेल में डाला गया था वो बिलकुल नहीं रोई थी.

मतलब उसके ऊपर जमोगा का साया था. उसकी उंगली तो गई, लेकिन जान बच गई.

जमोगा से बच्चे को बचाने के लिए गरम तेल ही एकमात्र उपाय नहीं है. रामलली का बेटा अब चार साल का है और ख़तरे से बाहर है.

उसको जमोगा से बचाने के लिए चमगादड़ का खून उसके मुंह में डाला गया था.

अंधविश्वास

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Image caption बच्चे की जल गई सबसे छोटी उंगली.

आखि़र औरतें कैसे जान पाती हैं कि उनका बच्चा जमोगा के चंगुल में है? रामलली, रमादेवी और एक अन्य महिला कहती हैं, "कभी बच्चा घूर के देखने लगता है. कभी अपना रंग पीला कभी नीला कर लेता है और कभी दूध बहुत पीने लगता है."

इन औरतों का मानना है कि डॉक्टर को दिखाने से भी कोई फायदा नहीं होता है.

जिह्वा अकेला गाँव नहीं है जहां औरतें इस तरह के अंधविश्वास की शिकार हैं. जिह्वा ग्राम सभा के रमना गाँव, ओई, बरहुँवा ग्राम सभा तथा कई अन्य ब्लॉक में इस तरह का अंधविश्वास फैला हुआ है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन और नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य के लिए इलाक़े में सक्रिय एक गैर सरकारी संगठन जुड़े डॉक्टर विश्वजीत कुमार का कहना है कि 12 साल पहले उन्होंने इस अंधविश्वास को देखा था, रायबरेली के शिवगढ़ में. हालांकि अब वहां ये ख़त्म हो गया है.

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