हरीश अय्यर को है 'दूल्हे' की तलाश

हरीश अय्यर इमेज कॉपीरइट Harish Iyer

समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले हरीश अय्यर को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही एक जीवनसाथी मिलेगा.

हरीश की ये उम्मीद उस वैवाहिक विज्ञापन के बाद जगी है जो उनकी मां पद्मा ने मुंबई के एक अख़बार में दिया है.

माना जा रहा है कि भारत में किसी समलैंगिक के विवाह का ये पहला विज्ञापन है.

विवाह के लिए अख़बार में विज्ञापन क्यों दिया, इस सवाल पर हरीश कहते हैं कि हर मां अपने बेटे के विवाह को लेकर चिंतित रहती है और इसी चिंता को दूर करने के लिए उन्होंने अख़बार में विज्ञापन दिया.

'विवाद नहीं'

हरीश नहीं चाहते हैं कि उनके विवाह के 'मासूम' विज्ञापन पर किसी तरह का विवाद हो.

भारत में समलैंगिक संबंधों को आमतौर पर सहजता से नहीं लिया जाता है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2009 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया था.

लेकिन दिसम्बर वर्ष 2013 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था.

इस फैसले पर समलैंगिकों ने काफी निराशा जताई थी.

अख़बारों ने मना किया

उन्हें धार्मिक समूहों के विरोध का भी सामना करना पड़ा है.

हरीश और उनकी मां पद्मा का दावा है कि भारत के तीन बड़े अख़बारों ने उनके वैवाहिक विज्ञापन को छापने से आनाकाना की.

कुछ ख़बरों के मुताबिक, इन अख़बारों को लगा कि इस तरह का विज्ञापन छापना कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ होगा.

लेकिन मुंबई के एक अख़बार ने इस विज्ञापन को आख़िर छाप ही दिया.

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