सड़क को लेकर अदालत हुई कड़क

  • 21 मई 2015
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मुंबई उच्च न्यायालय के जस्टिस अभय ओक ने सड़कों की ख़राब हालत के लिए प्रशासन और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ़ सख्त़ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.

न्यायालय ने कहा कि अच्छी सड़कें और फटुपाथ लोगों का मूलभूत अधिकार है और इसे लोगों को मुहैया कराना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है.

अदालत ने यह भी कहा है कि ख़राब सड़कों की वजह से होनेवाली दुर्घटनाओं के लिए पीड़ित लोग मुआवज़ा भी माँग सकते हैं.

'देश भर के लिए उदाहरण'

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मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता गणेश सोवनी ने कहा कि अब पूरे देश में लोग इस फ़ैसले का अदाहरण दे कर नगर निगमों पर मुक़दमा कर सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा, “यह एक अहम फ़ैसला है. संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास ज़िम्मेदारी से भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है.”

जस्टिस अभय ओक ने मुंबई की सारी सड़कें 30 मई तक ठीक करने के आदेश दिए हैं.

पूरे राज्य में लागू होगा फैसला

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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य के बाक़ी नगर निगमों को भी इस याचिका के दायरे में लिया था.

यह फैसला पूरे राज्य में लागू होगा.

ढाई साल पहले जस्टिस गौतम पटेल ने मुंबई की बदहाल सड़कों के बारे में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था.

जिसे, जनहित याचिका में तब्दील कर सरकार और मुंबई नगर निगम को नोटिस भेजा गया था.

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