फिलहाल सज्जनगढ़ में ही रहेगा 'उस्ताद'

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टाइगर 24 उर्फ उस्ताद के मामले पर कहा है कि वो फिलहाल सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही रहेगा.

उस्ताद ने कथित तौर पर एक सुरक्षा गार्ड को मार डाला था जिसके बाद उसे किसी चिड़ियाघर या वैसे स्थान पर रखने की बात कही जा रही है.

बाध को रणथंभौर से हटाकर फ़िलहाल सज्जनगढ़ में रखा गया है जहां वो एक सीमित क्षेत्र में रह रहा है.

गुरूवार को दिए गए फ़ैसले में जस्टिस एके सीक्रि ने कहा कि मामला 28 मई को राजस्थान हाईकोर्ट के सामने लंबित है ऐसे में सुनवाई तक यथास्थिति बनाई रखी जाएगी.

राजस्थान सरकार के टी-24 यानी उस्ताद को रणथंभौर से हटाकर सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के 10 हज़ार वर्गफीट विस्तार के घेराव में रखने के फ़ैसले के खिलाफ़ दायर एक याचिका की सुनवाई में अदालत ने यह फैसला दिया.

होटल लॉबी का दबाव

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वन विभाग के अनुसार, 'उस्ताद' ने बीती आठ मई को वन रक्षक रामपाल पर हमला कर दिया, इसमें वनरक्षक की मौत हो गई थी.

वन विभाग अपने इस फ़ैसले को सही बता रहा है, जबकि वन्यजीव प्रेमी इसमें रणथंभौर की प्रभावशाली होटल लॉबी का दबाव देख रहे हैं.

जानकार कहते हैं कि अपने आकर्षक व्यक्तित्व और शिकारी अंदाज़ की पहचान वाले 'उस्ताद' को इंसान और बाघ के हितों के बीच टकराव की क़ीमत चुकानी पड़ी है.

इस पर इंसानों पर लगातार हमले करते रहने का आरोप लगा है. वन विभाग के मुताबिक़, "इस बाघ के हमलों से अब तक चार लोग जान गवां चुके हैं."

लेकिन वन्यजीव प्रेमियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

रणथंभौर क्षेत्र में गैर सरकारी संगठनों के एक समूह 'जन संवाद' के संयोजक हरिप्रसाद योगी कहते हैं, "बाघ को होटल लॉबी के प्रभाव में बेदखल किया गया है."

बाघ की फ़ितरत

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उसी इलाक़े के आलनपुर गांव के मूल निवासी योगी कहते हैं, "बाघ और इंसान यहाँ सदियों से संग संग रहते रहे हैं, मगर पर्यटन उद्योग के कारण इंसान की आवाजाही इनकी मांद तक जा पहुंची है. इसीलिए वो अब निशाने पर हैं."

रणथंभौर में नेचर गाइड एसोसिएशन के प्रमुख यादवेन्द्र सिंह कहते हैं, "रणथंभौर और उसके आस पास क़रीब सौ होटल बन गए हैं और हर साल ढाई लाख सैलानी यहाँ आते हैं."

यादवेंद्र सिंह के मुताबिक़, "बाघ अपने इलाक़े में मस्त घूमता है, न तो वो अन्य इलाक़े में दख़ल देता है और न ही अपने क्षेत्र में किसी का हस्तक्षेप सहन करता है."

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उनके अनुसार, "मुझे नहीं लगता है कि उस्ताद नरभक्षी हो गया है. 'उस्ताद' ने बड़ी मुश्किल से अपना इलाक़ा बनाया. वो बाघ है, शिकार उसकी फ़ितरत है, लेकिन कभी दूसरे के घर नहीं गया, इंसान ने ही उसके घर में दखल की है."

क़रीब 392 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में फैले रणथंभौर को बाघों की बेहतरीन पनाहगाह माना जाता है.

इस इलाके में नील गाय, चीतल, हिरण, लोमड़ी, बन्दर, जरख और चिंकारा जैसे जानवर पाए जाते हैं.

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