पटरियों पर जमे गूजर, कई ट्रेनें रद्द

गूजर नेता

राजस्थान में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे गूजर आंदोलनकारियों ने बीती रात दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग की पटरियों पर ही गुज़ारी.

आंदोलनकारियों के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने बीबीसी को बताया, ''हम अब और इंतज़ार नहीं कर सकते. गूजर अब की बार आख़िरी बार ये नारा दे रहे हैं. ''

राजस्थान में गूजर सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

इन आंदोलनकारियों ने दिल्ली-मुंबई के रास्ते भरतपुर ज़िले के पीलूपुरा रेल लाइन पर कब्ज़ा जमाया हुआ है.

15 दिन तक चली 'न्याय यात्रा' की समाप्ति के बाद गूजर गुरुवार को भरतपुर ज़िले के समोगर में जमा हुए थे.

रेल यातायात प्रभावित

पूरे दिन के भाषण, प्रदर्शन और नारेबाज़ी के बाद उन्होंने राज्य सरकार को एक घंटे में जवाब देने को कहा लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो तो आंदोलनकारियों ने पीलूपुरा कूच कर दिया और रेल यातायात रोक दिया.

Image caption (फाइल फोटो)

इसकी वजह से भारतीय रेल सेवा को अपनी पचास से ज्यादा गाड़ियों के मार्ग बदलने पड़े हैं, पांच गाड़ियां की सेवा रद्द करनी पड़ी है, 11 रेलगाड़ियों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है और शताब्दी एक्सप्रेस को अपनी मार्ग बदलना पड़ा है.

रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस आंदोलन की वजह से साठ गाड़ियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं और परिवहन सेवा पर भी असर पड़ा है.

बातचीत का न्यौता

इस बीच राज्य सरकार ने मामले का समाधान निकालने के लिए गूजर नेताओं को बातचीत का न्यौता दिया है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार रात अधिकारियों और मंत्रिमंडल के नेताओं के साथ बैठक कर हालात का जायज़ा लिया.

समझा जा रहा है कि राज्य सरकार इन गूजर आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए दो मंत्रियों राजेंद्र राठौड और हेम सिंह भड़ाना को ज़िम्मेदारी दे सकती है.

Image caption (फाइल फोटो)

इस आंदोलन की वजह से पूर्वी राजस्थान में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और रेल कर्मचारियों को चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं.

पीलूपुरा में 23 मई 2008 को गूजर आंदोलकरियो और पुलिस में भिड़ंत हुई थी. इस घटना में 16 लोग मारे गए थे. गूजर वर्ष 2006 से रुक रुक कर आंदोलन कर रहे हैं.

सरकार ने गूजरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी की थी लेकिन अदालत के स्थगन के बाद ये मामला क़ानूनी विवाद में फंस गया है.

इस आंदोलन ने कई बार हिंसक घटनाएं देखी हैं और इसमें 72 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है.

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