कई स्कूलों में छात्र नहीं, पर शिक्षक कई

कश्मीर घाटी में मौजूद स्कूल इमेज कॉपीरइट HAZIQ QADRI

भारत प्रशासित कश्मीर में जहाँ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घाटी के 100 स्कूलों में एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है.

वहीँ इसके उलट कई स्कूल ऐसे भी है जहां सैकड़ों छात्रों पर दो या तीन शिक्षक ही मौजूद हैं.

कश्मीर के स्कूल शिक्षा मंत्री नईम अख़्तर ने ऐसे स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है जिनमें एक भी छात्र का दाखिला नहीं है.

नईम अख़्तर कहा, "किराए की इमारतों में चलने वाले वैसे स्कूल जिसमें एक भी छात्र नहीं है, उन स्कूलों को बंद करके हमने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने की शुरुआत की है."

बांदीपुरा ज़िले और जम्मू के कुछ हिस्सों में ऐसे कई स्कूलों को बंद किया गया है.

उन्होंने बताया कि इन स्कूल के शिक्षकों और कर्मियों को जहां ज़रूरत होगी वहां स्थानांतरित किया जाएगा.

लंबी फेहरिस्त

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सरकारी नियम के मुताबिक़ स्कूलों में हर 25 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन शिक्षा विभाग के आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं.

गंदरबल ज़िले में पांच प्राथमिक स्कूलों में एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है, लेकिन इनमें से हर एक स्कूल में तीन शिक्षक हैं.

बारामुला के बालक हाई स्कूल सिंहपुरा में 12 छात्रों पर नौ शिक्षक हैं. श्रीनगर के जीएमएस चंबरदूरी में नौ छात्रों के लिए छह शिक्षक हैं. श्रीनगर के ही हाई स्कूल भगवानपुरा में 31 छात्रों को पढ़ाने के लिए 20 शिक्षक नियुक्त हैं.

यह फेहरिस्त अभी और लंबी है.

निराशा

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श्रीनगर के आरएन मंदिर जोन में बालक हाई स्कूल में 53 छात्रों के लिए 25 शिक्षक और रतंग जोन के हाई स्कूल में 40 छात्रों के लिए 13 शिक्षक नियुक्त हैं.

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 70 स्कूलों में एक भी छात्र का दाखिला नहीं है, लेकिन छात्रों को पढ़ाने के लिए भारी संख्या में शिक्षक बहाल हैं.

श्रीनगर में साताबूनी हावाल प्राइमरी स्कूल में एक भी छात्र नहीं है, लेकिन शिक्षक तीन हैं.

श्रीनगर के एक प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके स्कूल में एक भी छात्र नहीं है और उन्होंने अधिकारियों से कई बार तबादले की गुज़ारिश की, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी.

संतुलन

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य में छात्रों की संख्या करीब 16 लाख है और शिक्षकों की संख्या एक लाख 43 हज़ार है.

हालाँकि शिक्षा विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि छात्रों का 16 लाख का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है, जिसका इस्तेमाल शिक्षक मिड डे मील और छात्रों की यूनिफॉर्म के नाम पर ज्यादा फंड लेने के लिए करते हैं.

शिक्षा मंत्री ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की थी.

स्कूली शिक्षा विभाग के निदेशक शौकत अहमद बेग का कहना है कि वे छात्र-शिक्षक अनुपात को सरकारी मापदंड के अनुरूप संतुलित करने का प्रयास कर रहे हैं.

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