अच्छे दिन, जुमला या हक़ीक़त?

  • 26 मई 2015
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के एक साल पर उन्होंने ख़ुद ही कहा कि सभी के अच्छे दिन आए हैं लेकिन कुछ लोगों के बुरे दिन आए हैं.

अनेक भारतीयों को नरेंद्र मोदी के चुनावी नारे - 'अच्छे दिन आने वाले हैं' से ख़ासी उम्मीदें थीं.

मोदी सरकार ने ग्रीनपीस समेत कुछ एनजीओ की विदेशी फंडिग पर रोक लगाई और शहरी वर्ग से जुड़े भी कई फ़ैसले लिए.

बीबीसी ने जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और एक निजी बैंक के कर्मचारी से उनके अनुभव पूछे.

अरुणा रॉय, सामाजिक कार्यकर्ता

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नरेंद्र मोदी सरकार से जो उम्मीदें थीं, वो जो वादे करके सत्ता में आए थे, उन्होंने उससे ठीक उल्टा रास्ता चुना है. लोकतंत्र में हम एक समूह को देखते हैं.

पार्टी और देश एक लोकतांत्रिक पद्धति से चलना चाहिए. वैसा बिलकुल नहीं हो रहा है. सिर्फ़ 'वन मैन शो' है. वंशवाद अगर बुरा है तो ये भी बुरा है.

इनकी कथनी और करनी में बड़ा फर्क है. सामाजिक क्षेत्र के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान ही नहीं है. खाद्य सुरक्षा आप शुरू नहीं कर रहे हो. इनक्लूसिव ग्रोथ की बात करते हैं. कहां है इनक्लूसिव ग्रोथ? कंपनी राज है.

मनरेगा को आप गालियां देते हो, जबकि इससे मज़दूरों का भला हुआ है. ये सब मानते और जानते हैं. किसानों और मज़दूरों की समस्या को नज़रअंदाज़ कर आप विदेशों में घूमते रहते हो.

आपने मेक इन इंडिया जैसी चमक-धमक की बातें तो कर दीं, लेकिन गांव के लोगों को, मज़दूरों को और किसानों को ये पता ही नहीं कि इसमें उनकी क्या भूमिका होगी, उनका कैसे भला होगा?

लैंड बिल लाए हो जो किसानों के हित के विपरीत है. सूचनाएं देने में पारदर्शिता नहीं है. केंद्रीय सूचना अधिकारी कई महीनों से नहीं हैं. सूचना के अधिकार के तहत जनता तक पारदर्शी तरीके से सूचनाएं ही नहीं पहुंच रही हैं.

सरकार के ग़ैर लोकतांत्रिक तरीके पर सवाल उठाने वालों को परेशान किया जा रहा है.

ग्रीनपीस जैसे कई एनजीओ के फंड पर रोक लगा दी गई. आप कहते हो कि वो विकास विरोधी हैं. लेकिन ऐसा कहने से काम नहीं चलता. आप खुलकर जनता को बताओ ना कि कैसे वो एंटी डेवलपमेंट है.

पूरी जानकारी दो. ऐसे निरंकुश फ़ैसलों से अब लोगों के मन में इस सरकार के प्रति ग़ुस्सा पनपने लगा है.

अपूर्वा भटनागर, निजी बैंक के कर्मचारी

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मोदी सरकार ने पिछले एक साल में बेहतरीन काम किया है. जन धन योजना की वजह से ग़रीबों के भी बैंक अकाउंट खुले और उन्हें अपने पैसे को व्यवस्थित तरीके से रखने का मौका मिला. ये एक बेहतरीन क़दम था.

मोदी सरकार के आने के बाद से रुपए की अंतरराष्ट्रीय क़ीमत में इज़ाफ़ा हुआ जो काबिले तारीफ़ है. मुझे तो उनके नेतृत्व में देश आगे जाता दिख रहा है.

विकास की यही गति रही तो मोदी सरकार के नेतृत्व में देश बढ़ता जाएगा. मुझे नरेंद्र मोदी जी से बस एक ही शिक़ायत है.

उनकी सरकार में एक विदेश मंत्री पहले से ही हैं. तो अगर दूसरे देशों से अच्छे संबंध बनाने के लिए उन्हें विदेश यात्रा का मौक़ा दिया जाए तो बेहतर है.

वो देश में ही रहकर विदेश मंत्री नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के तौर पर, यहां की समस्याओं पर ध्यान दें तो ज़्यादा अच्छा होगा.

( बीबीसी संवाददाता प्रभात पांडेय से बातचीत पर आधारित )

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