ग्रीनपीस को दिल्ली हाईकोर्ट की राहत

  • 27 मई 2015
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को भारत के गृह मंत्रालय को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस के दो भारतीय बैंक अकाउंट अस्थायी तौर पर चालू करने का आदेश दिया है.

कोर्ट से अस्थायी राहत मिलने के बाद संस्था अपने खाते में मौजूद धन के बड़े हिस्से का उपयोग कर सकेगी. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ग्रीनपीस भारतीय दानदाताओं से डोनेशन भी ले सकेगी.

फ़ैसले के बाद जारी अपने बयान में ग्रीनपीस ने कोर्ट से मिली से अस्थायी राहत को 'लाइफ़लाइन' बताते हुए वायु प्रदूषण, वन रक्षा और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दोबारा कैंपेन शुरू करने की बात कही है.

ग्रीनपीस के मुताबिक अदालत ने सरकार से कहा कि वो उसे फॉरेन कंट्रीब्यूशन अकाउंट के 25 प्रतिशत राशि के प्रयोग की इजाज़त दे.

भारत सरकार ने ग्रीनपीस के पंजीकरण को निरस्त करते हुए उसके सभी बैंक अकाउंट सील कर दिए थे.

'सरकार का नोटिस'

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Image caption कार्यकारी निदेशक समित ऐच ने ग्रीनपीस के पास एक महीने के ही खर्च की बात कही

भारत सरकार ने ग्रीनपीस को दिए नोटिस देकर पूछा था कि उसे भारत में स्थाई तौर पर क्यों न बंद कर दिया जाए?

संस्था ने अस्थायी राहत के लिए अदालत में अर्जी दी थी. संस्था ने अदालत से अस्थायी राहत की माँग करते हुए कहा था कि उसके पास मात्र एक महीने का ख़र्च चलाने के लिए पैसा है.

इससे पहले भारत सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा था कि ग्रीनपीस ने एफ़सीआरए (विदेशी चंदा नियमन कानून) का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए विदेशी चंदे को देश के भीतर से मिलने वाले चंदे के साथ जोड़ दिया.

ग्रीनपीस केंद्र सरकार के आरोपों को गलत बताता रहा है. भारत में ग्रीनपीस पर विदेशी चंदा हासिल करने पर अभी भी पाबंदी है.

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