'हमले के ठीक पहले फ़ोर्स वापस ले गए थानेदार'

हरियाणा के फ़रीदाबाद के अटाली गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. मगर, यह ख़ामोशी काफ़ी बेचैन करने वाली है.

बस कुछ ही किलोमीटर पीछे बल्लभगढ़ के थाने में वो लोग रह रहे हैं जो पांच दिनों पहले अपने गांव में हिंसा का शिकार हुए थे.

उन्हें वो दिन याद है जब गांव के ही लोगों के एक समूह ने उनके घरों पर हमला कर दिया था जिसमें कई मकानों को नुकसान पहुंचा था, कुछ लोग घायल हुए थे और कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे.

मामला गांव में एक धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर शुरू हुआ. यह मामला अदालत तक पहुंचा और फिर कोर्ट के आदेश पर निर्माण का काम शुरू हुआ.

पुलिस की देख रेख में निर्माण का काम शुरू हुआ और गांव के सरपंच राजेश चौधरी ने लोगों को भरोसा दिलाया कि निर्माण जारी रहेगा. मगर सरपंच के आश्वासन के बावजूद, अगले ही दिन जिस समय निर्माण का काम चल रहा था, कुछ लोगों ने धावा बोल दिया.

मनमानी

इशाक ख़ान लम्बरदार के सिर पर पट्टी बंधी ही हुई है.

उनके सिर की चोट का ज़ख्म तो अहिस्ता-अहिस्ता भर रहा है. मगर उनके दिल का ज़ख्म हरा बना हुआ है क्योंकि वो कहते हैं उनके गांव को किसी की नज़र लग गई है और अब शरारती तत्व उनके इलाके में मनमानी कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "चार सौ सालों से हम सब यहां आपस में प्यार मुहब्बत से रहते आ रहे हैं. कभी कोई तकरार नहीं हुई. पता नहीं, किसकी नज़र लग गई."

थाने में शरण ले रहे लोगों की जमात में मौजूद ज़ाकिर हुसैन का कहना था कि जिस वक़्त गांव में तनाव बढ़ रहा था, वहां थाने के प्रभारी भी मौजूद थे जो वहां से फ़ोर्स को लेकर चलते बने और गांव उपद्रवियों के हवाले हो गया.

उन्होंने कहा, उस "शाम वो अपने साथ मौजूद जवानों को लेकर निकल लिए और उसी वक़्त हम पर हमला किया गया. हमारे घरों में घुस कर आगज़नी की गयी."

हांलाकि थाने में शरण लिए लोगों को मलाल है कि कभी साथ उठने बैठने वाले उनके गांव के दूसरे लोग आज बिल्कुल बेगाने हो गए हैं और किसी ने उनका हाल चाल तक पूछना गवारा नहीं किया.

हालांकि गांव के सरपंच राजेश चौधरी थाने में मौजूद थे और लोगों को गावं वापस लौटने के लिए भरोसा दिला रहे थे.

मगर शरण लिए लोगों का कहना है कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया है.

कार्रवाई की मांग

Image caption फरीदाबाद के सहायक पुलिस आयुक्त विष्णु दयाल कहते हैं कि इलाके में शांति तेज़ी के साथ बहाल हो रही है.

गांव के लोग पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जिसने घटना के दिन गांव में मौजूद होते हुए भी उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं किया.

घटना को पांच दिनों से ज्यादा बीत चुके हैं और अबतक किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में नाराज़गी है. फ़रीदाबाद के सहायक पुलिस आयुक्त विष्णु दयाल कहते हैं कि इलाके में शांति तेज़ी के साथ बहाल हो रही है.

उन्होंने कहा, "अब एक छोटी सी बात ने इतना बड़ा रूप धारण कर लिया जबकि गांव के सभी पक्षों में आपस में समझौता हो गया था. कुछ शरारती तत्वों ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है. हम जल्द ही आगज़नी और हमले में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने वाले हैं.

कुछ बुजुर्गों का कहना है कि यह सबकुछ आने वाले पंचायत चुनाव की वजह से ही हुआ है ताकि नेता माहौल का फायदा उठा पाएं.

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