राहुल गांधी में ये बदलाव कैसे?

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अगर आप को कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का मौक़ा मिले तो उनसे आप पहला सवाल क्या करेंगे? यही सवाल मैंने अपने कुछ युवा साथियों से फ़ोन करके पूछा.

एक ने कहा वो उनसे पूछेंगे कि आप 56 दिनों तक कहां ग़ायब थे और उस दौरान आपने क्या खाया कि अब आप आक्रमणकारी बन गए हैं?

दूसरे ने कहा कि उनका सवाल होगा, "आप के अचानक आक्रामक होने का राज़ क्या है?".

तीसरे ने कहा कि उनका प्रश्न होगा, "आप अब अचानक इस क़दर मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर क्यों बरस रहे हैं?"

तीनों उत्तर में एक बात सामान्य थी और वो थी राहुल गांधी का आक्रामक रुख़, ख़ास तौर से मोदी और आरएसएस के ख़िलाफ़.

नया चेहरा

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ये बात सही है कि जब से वो विदेश में 'विराम' या 'चिंतन' करके लौटे हैं हम राहुल गांधी का एक नया चेहरा देख रहे हैं.

उनकी वापसी के बाद दिल्ली में किसानों की रैली में उनका नया अवतार पहली बार नज़र आया. उसके बाद लोकसभा में भी उनका आक्रामक रुख़ देखने को मिला.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने राहुल गांधी के इस नए अवतार को अद्भुत परिवर्तन क़रार दिया. उमर का कहना था कि वो उनके इस परिवर्तन से सीखने की कोशिश करेंगे.

कांग्रेस के राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई के कार्यक्रम 'दृष्टिकोण 2015' में एक बार फिर उनका नया आक्रामक रुख दिखाई दिया.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश को आरएसएस की एक शाखा में बदल रही है.

द हिन्दू अख़बार के अनुसार राहुल गांधी काफी आक्रामक मूड में थे. राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि 'आरएसएस अपनी विचारधारा देश पर थोप रहा है. आरएसएस अनुशासन के लिए जाना जाता है लेकिन ये ढोंग है. अनुशासन की आड़ में ये संस्था वाद-विवाद और संवाद को कुचलती है.'

राहुल ने मोदी सरकार पर इल्ज़ाम लगाया कि उनके राज में मुद्दों पर आम चर्चा नहीं होती, व्यक्तित्व को दबाया जा रहा है.

भूमिका

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राहुल गांधी का मोदी सरकार और आरएएस के ख़िलाफ़ ये आक्रमण क्यों?

एक ऐसा नेता जो यूपीए सरकार के दौरान खामोश रहा, जिसका वजूद सोशल मीडिया पर नहीं है और जिसने पिछले साल एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में अपने ख़राब प्रदर्शन से अपने प्रशंसकों को मायूस किया, अब इतना आक्रामक रुख़ क्यों अपनाए हुए है?

आरएसएस विचारक और बीजेपी के महासचिव राम माधव के अनुसार राहुल गांधी की चार पीढ़ियों के विरोध के बावजूद आरएसएस आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने ट्वीट करके कहा, "परदादा ने कोशिश की. दादी ने कोशिश की. पिता ने भी. चार पीढ़ियों की नफरत के बावजूद आरएएस फला फूला. मगर कांग्रेस?"

बीजेपी के प्रवक्ता नलिन कोहली के अनुसार राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला सियासत में योग्य बने रहने की एक कोशिश है.

हक़ीक़त ये है कि राहुल गांधी की ये सियासत में एक तरह से दूसरी पारी है. पहली पारी में वो ज़बरदस्त लुढ़के.

पिछले साल उनकी निगरानी में पार्टी की चुनाव में सबसे बड़ी हार हुई. उनकी पार्टी और खुद उनका सियासी वजूद खतरे में पड़ गया. उनका 56 दिनों का 'वनवास' उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है.

शायद उन्होंने चिंतन किया होगा कि अब उनका क्या होगा? अब कांग्रेस का क्या होगा? उनकी देश में भूमिका क्या होगी?

कामयाब रुख

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चिंतन कहें या आत्मा की खोज, उनकी सोच अब रंग ला रही है. अप्रैल में किसान रैली में नया रुख़ कामयाब रहा. अच्छी प्रतिक्रियाएं आईं.

राहुल गांधी की दूसरी पारी अब तक सफल रही है जिसका एक कारण खुद मोदी सरकार है.

बीजेपी को दिल्ली चुनाव में एक ज़बरदस्त झटका लगा जिससे नरेंद्र मोदी की अपराजेयता वाली छवि को झटका लगा.

दूसरी तरफ मोदी सरकार ने अपने आलोचकों को सरकार की आलोचना के मौके दिए.

उनके ख़िलाफ़ 'विरोधी' आवाज़ों को कुचलने की कोशिश का इल्ज़ाम हो या फिर अर्थव्यवस्था में कोई ख़ास वृद्धि न होने का आरोप हो या फिर अपने चुनावी वादों को एक साल में पूरा न करने के इल्ज़ाम.

मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास अब काफ़ी मौके और मुद्दे हैं. राहुल गांधी इसका फायदा उठा रहे हैं.

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