राहत के लिए गए अफ़सरों ने 'दावतें उड़ाईं'

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तक़रीबन दो साल पहले जून में उत्तराखंड में आई ज़बरदस्त बाढ़ और भूस्खलन के बाद वहां राहत और बचाव के लिए भेजे गए अफ़सरों और कर्मचारियों के दावतें उड़ाने की जानकारी मिली है.

यह जानकारी एक आरटीआई याचिका के ज़रिए सामने आया है. सूचना आयोग की पहल पर जो बिल आरटीआई एक्टिविस्ट को दिए गए, वे चौंकाने वाले हैं. इस मामले में मुख्यमंत्री ने जाँच के आदेश दिए हैं.

बाढ़ और भूस्खलन में हज़ारों लोगों की मौत हुई थी कई हफ़्ते तक वहाँ राहत कार्य चला था. ग़ौरतलब है कि उस समय हज़ारों लोग भूखे, प्यासे और बदहाल स्थिति में पहाड़ों में फंसे हुए थे.

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मुसीबत का मंज़र याद करें और इन बिलों का ब्यौरा देखें तो सरकारी मशीनरी की उदासीनता चौंकाने वाली है. इन बिलों में मटन, चिकन, अंडा करी और शाही पनीर के व्यजंनों के भारी-भरकम बिल हैं.

सरकारी अफ़सरों और राहत के लिए भेजे गए लोगों की आवाजाही पर भी भारी खर्च दिखाया गया है. होटल में एक दिन ठहरने के लिए 7000 रुपए बतौर किराया चुकाया गया है.

खाने का बिल 25 लाख रुपये

आरटीआई एक्टिविस्ट भूपेंद्र कुमार के मुताबिक़, उन्होंने आपदा के दौरान खर्चे के बिलों की कॉपी मांगी थी.

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वे कहते हैं, ''रोज़ाना के खाने-पीने में मटन, चिकन, अंडा और पनीर का इस्तेमाल किया गया, जबकि वहां हज़ारों लोग भूख से मर रहे थे. सारे बिल हैं, तमाम सबूत हैं."

उन्होंने आगे बताया, ''आधा लीटर दूध की क़ीमत 194 रुपए बताई गई है. कारों के बिल लगाए गए हैं जिनमें डीज़ल भरा गया था. लेकिन वे नंबर हमारी जांच के बाद स्कूटर और मोटरसाईकिल और थ्रीव्हीलर के निकले हैं.''

आरटीआई एक्टिविस्ट के मुताबिक होटलो में रहने खाने पर ही 25 लाख रुपये से ज़्यादा उड़ा दिए गए. एक ही दुकान से तीन दिन में 1800 रेनकोट खरीदे गए. एक हेलीकॉप्टर कंपनी को चार दिन के लिए असाधारण भुगतान किया गया.

सबूत मुख्यमंत्री को भेजे

सूचना आयुक्त अनिल शर्मा कहते हैं, ''सूचना के अधिकार के तहत आपदाग्रस्त जिलों से सूचना मांगी गई थी कि आपदा राहत पर कितना पैसा खर्च हुआ.''

Image caption उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जांच के आदेश दिए हैं

वो आगे कहते हैं, “मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने मुख्यमंत्री को सभी सबूत भेज दिए हैं और शिकायतकर्ता के आग्रह पर सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की है.''

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फिलहाल मुख्य सचिव एन रविशंकर को जांच का जिम्मा सौंपा है.

एन रविशंकर कहते हैं,''मुख्यमंत्री से निर्देश मिला है और नियमानुसार जांच की जाएगी, कहीं पर भी प्रशासनिक स्तर पर या किसी अफ़सर से कोई चूक हुई है तो नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.''

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