गर्मी की मार से चिकन महंगा

  • 1 जून 2015
पोल्ट्री फॉर्म में चूजे

भारत में भीषण गर्मी की वजह से चिकन के दाम बढ़ गए हैं.

असल में तेज़ गर्मी के कारण बड़े पैमाने पर मुर्गियों की मौत हुई है जिससे मुर्गीपालन उद्योग मुश्किल में है.

दिल्ली की ग़ाजीपुर मंडी में रईस एंड कंपनी के मालिक रईस अहमद का कहना है कि खुदरा बाज़ार में चिकन की कीमत कुछ दिन पहले 140 रुपए प्रति किलोग्राम थी. यह क़ीमत अब बढ़ कर 180 रुपए प्रति किलो हो गई है.

वे कहते हैं कि गर्मी की वजह से मुर्गियां मर रही हैं, लिहाजा उनकी सप्लाई में कमी आ गई है. इसके अलावा गर्मी की वजह से ही उनका वजन भी कम हो गया है.

'200 करोड़ रुपए का नुकसान'

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नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमिटी के बिज़नेस मैनेजर संजीव चिंतावर के मुताबिक गर्मी की वजह से तक़रीबन 70 लाख मुर्गियों और चूजों की मौत हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन उद्योग को लगभग 200 करोड़ रुपए का नुक़सान होने की आशंका है.

सबसे ज़्यादा नुक़सान तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हुआ है, जहां सबसे ज़्यादा पोल्ट्री फ़ॉर्म हैं.

इन दो राज्यों में 10,000 से ज़्यादा पोल्ट्री फॉर्म हैं, जहां तक़रीबन 13-14 करोड़ मुर्गियां पाली जाती हैं.

सिर्फ इन दो राज्यों में ही 100 करोड़ रुपए से अधिक के नुक़सान का अनुमान है.

'राष्ट्रीय आपदा घोषित हो'

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आंध्र प्रदेश पोल्ट्री फ़ेडरेशन का कहना है कि यदि गर्मी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाता है, तो इस उद्योग को थोड़ी राहत मिलेगी.

राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने से बैंक उन्हें आसानी से पैसे देंगे और ब्याज़ की दर भी कम होगी. पोल्ट्री उद्योग को मौजूदा संकट से उबारने के लिए यह ज़रूरी है.

लेकिन गर्मी का मुर्गियों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

इस सवाल का जवाब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की मुर्गीपालन शोध परिषद के मुख्य वैज्ञानिक एसवी रामाराव देते हैं.

गर्मी से मौत

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रामाराव ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि मुर्गियां 37-38 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान तक सहज रहती हैं. उसके बाद समस्याएं शुरू होती है.

शरीर में पानी की कमी होने से मुर्गियों को साँस लेने में दिक्कत होती है.

ऑस्मोसिस की प्रक्रिया गड़बड़ होने से शरीर में तरल पदार्थों का प्रबंधन गड़बड़ हो जाता है.

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रामाराव कहते हैं कि मुर्गियों के शरीर से ज़्यादा कार्बन डाइ ऑक्साइड निकलने से उन्हें दिक्कत होती है. जिससे उनकी मौत होने लगती है.

गर्मी के सामान्य से 3-4 डिग्री तक बढ़ने पर पोल्ट्री फ़ॉर्म में पानी के छिड़काव करने और कूलर लगाने जैसे उपायों से स्थिति संभाली जाती है.

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