अब खड़े होकर पेशाब कर सकेंगी महिलाएं

  • 4 जून 2015

भारत में दीवारों और पेड़ों पर पुरुषों को पेशाब करते देखना एक आम नज़ारा है. स्थिति कितनी ही दबाव भरी हो, लेकिन महिलाओं के पास ये विकल्प नहीं होता.

कभी तो सार्वजनिक टॉयलेट ढूंढने की जद्दो-जहद और अगर टॉयलेट मिल भी जाए तो वो इस्तेमाल करने की हालत में नहीं होते.

ऐसे में महिलाओं के पास दो विकल्प बचते हैं – या तो वे ख़ुद को घंटों तक कंट्रोल करें और या फिर ऐसे शौचालयों का इस्तेमाल करें और संक्रमण का ख़तरा लें.

Image caption भारत में पब्लिक शौचायलों की स्थिति बेहद ख़राब है

टॉयलेट सीट से बचाव

लेकिन अब महिलाओं के पास तीसरा विकल्प उपलब्ध है – पी-बडी.

ये एक ऐसी किट है जिसका इस्तेमाल कर महिलाएं खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

इस किट को पहली बार भारत में बनाने वाले बिज़नेसमैन दीप बजाज ने बीबीसी को बताया, ‘ये एक नली जैसी किट है जिसका इस्तेमाल कर महिलाएं खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं. इसके इस्तेमाल के बाद महिलाएं इसे फेंक सकती हैं. यानि उन्हें गंदी टॉयलेट सीट पर बैठने की ज़रूरत नहीं है.’

इन्फ़ेक्शन का ख़तरा

Image caption महिलाओं का कहना है कि वे घंटों ख़ुद को कंट्रोल करती हैं जब तक उन्हें साफ़ टॉयलेट नहीं मिलता

भारत में गंदे टॉयलेट इस्तेमाल करने के कारण हज़ारों महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन यानि यूटीआई होता है.

लेकिन पी-बडी केवल इस इन्फ़ेक्शन का ही समाधान नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उन महिलाओं के लिए भी उपयोगी है जो आर्थराइटिस यानि जोड़ों में दर्द की वजह से पेशाब करने के लिए झुक नहीं पातीं.

दीप बजाज का कहना था, ‘केवल सार्वजनिक शौचालय ही नहीं, कभी-कभी रेस्त्रां के टॉयलेट भी गंदे पाए जाते हैं. आजकल की मॉडर्न महिलाएं काम के सिलसिले में खूब सफ़र करती हैं. चाहे वो ट्रेन का लंबा सफ़र हो या हवाईजहाज़ की छोटी यात्रा, सार्वजनिक टॉयलेट से इन्फ़ेक्शन लगने का ख़तरा महिलाओं को रहता ही है.’

Image caption इस किट के इस्तेमाल से महिलाएं खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं.

पश्चिमी देशों में पी-बडी जैसी किट आसानी से उपलब्ध होती है. लेकिन भारत में इसे पहली बार लाया गया है और अब पी-बडी कुछ स्टोर्स में और ऑनलाइन भी उपलब्ध है.

पुरुषों से जलन

Image caption दीप बजाज ने ये प्रॉडक्ट पहली बार भारत में लॉन्च किया है

इसे इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का कहना है कि ये प्रॉडक्ट उनके लिए एक राहत बन कर आया है.

मुंबइ में रहने वाली हनी बजाज ने बीबीसी को बताया, ‘भारतीय महिलाओं को हर स्थिति में समझौता करने की आदत सी हो गई है. तो हम गंदे टॉयलेट को मजबूरी में इस्तेमाल तो करती हैं लेकिन जुगाड़ू तरीके से. हम वेस्टर्न टॉयलेट में हवा में ही थोड़ा झुक कर ही ख़ुद को हल्का कर लेती हैं. पी-बडी के आने से अब वो दिक्कत तो दूर हो ही गई है, औऱ साथ ही अब मुझे किसी बीमारी या इन्फ़ेक्शन का भी कोई डर नहीं है.’

Image caption ज़ीना अपने पुरुष दोस्तों से जलन महसूस करती थीं क्योंकि उन्हें खड़े होकर पेशाब करने की आज़ादी है

वहीं पी-बडी यूज़र ज़ीना चतवाल ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं एक सेल्स महिला हूं और मेरी रोज़ की सबसे बड़ी समस्या यही है कि मैं पेशाब करने कहां जाऊं. मैं हमेशा अपने पुरुष दोस्तों से कहती थी कि मुझे उनसे जलन महसूस होती है क्योंकि उनकी ज़िंदगी में ये दिक्कत नहीं है. लेकिन अब मैं भी उनकी तरह ख़ुद को हल्का कर सकती हूं.’

यानि खड़े होकर पेशाब करने की आज़ादी अब सिर्फ़ पुरुषों के पास ही नहीं बल्कि महिलाओं के पास भी है. लेकिन हां, फ़र्क इतना है कि कुछ पुरुष शौचालयों के बजाय दीवारों को अपना शिकार बनाते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार