मोदी सरकार ने तसलीमा को नहीं दिया वक़्त

  • 3 जून 2015
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बांगलादेश मूल की लेखिका तसलीमा नसरीन अपने देश के चरमपंथियों से लगातार मिलने वाली धमकियों के बाद भारत से अमरीका चली गई हैं.

न्यूयॉर्क की मानवाधिकार संस्था सेंटर फॉर एन्क्वायरी के अध्यक्ष और सीईओ रोनाल्ड लिंडसे ने कहा कि अपने जीवन पर खतरे को देखते हुए तसलीमा ने भारत छोड़ने का फैसला लिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार लिंडसे ने कहा कि मौत की धमकियों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है क्योंकि बांगलादेश में तीन महीनों में तीन लेखकों की क्रूरतापूर्वक हत्या की गई है.

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Image caption तीन महिने में तीन ब्ल़ॉगर्स की हत्या पर बांगलादेश में विरोध प्रदर्शन हुए थे

सेंटर बांग्ला लेखिका की हिफाजत के लिए अपनी तरह से हर संभव प्रयास कर रही है.

अलक़ायदा से मिल रही धमकियां

संस्था की एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार अलक़ायदा से जुड़े चरमपंथियों से तसलीमा नसरीन को मौत की धमकियां मिल रही हैं.

अलक़ायदा ने ही बांगलादेशी ब्लॉगर्स अविजीत रॉय, वशीकुर रहमान और अनंत विजय दास की हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी.

52 वर्षीय तसलीमा नसरीन अपने बेलाग लेखन के कारण चर्चा में रही हैं और चरमपंथियों से मिलने वाली धमकियों के कारण 1994 से निर्वासित जीवन बिता रही हैं.

वे फिलहाल स्वीडन की नागरिक हैं और पिछले दो दशक से भारत, अमरीका और यूरोप में रह रही हैं.

जल्द लौटेंगी भारत

2004 से उन्हें लगातार भारत से वीज़ा दिया जा रहा है.

तसलीमा ने ट्वीट कर बताया कि उन्हें उन लोगों से धमकियां मिल रही हैं जिन्होंने बांगलादेशी ब्लॉगर्स की हत्या की.

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वह अक्सर अमरीका लेक्चर्स और परिवार से मिलने जाती रहीे हैं.

तसलीमा ने कहा कि उन्होंने भारत पूरी तरह से छोड़ा नहीं है. भारत ने हमेशा उन्हें सुरक्षा प्रदान की है. वह जब भी सुरक्षित महसूस करेंगी, वापिस भारत आ जाएंगी.

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