मांझी-नीतीश की सियासत 'आम युद्ध' तक पहुँची

  • 4 जून 2015
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बिहार की सियासत का एक दौर था जब लोग राजनीतिक मतभेद के बावजूद निजी रिश्तों में शालीनता बरतते थे, लेकिन अब वो दिन नहीं रहे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी एक ही दल में रहे हैं. लेकिन, रिश्ते की खटास इस हद तक उतर आई है कि सत्तारूढ़ सरकार पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को सरकारी बंगले में लगे आम, लीची और कटहल के लगभग 150 पेड़ों से एक भी फल तोड़ने की इजाजत नहीं दे रही है.

जीतन राम मांझी और उनका परिवार मुख्यमंत्री के सरकारी बंगले का फल न खा सकें इसके लिए बाकायदा 24 घंटे के लिए 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों का पहरा बैठा दिया गया है.

फलों की पहरेदारी की जिम्मेदारी बिहार पुलिस की विशेष शाखा में तैनात एसपी (सुरक्षा) को सौंपी गई है.

ज़ब्त हुए फल

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी के अनुसार कुछ दिन पूर्व माताजी (जीतन राम मांझी की पत्नी) के कहने पर माली फल तोड़ने गया था, लेकिन उसे रोक दिया गया.

सारे फल ज़ब्त कर मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचा दिए गए.

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लीची, आम और कटहल के फलों की सुरक्षा के लिए 24 पुलिस अधिकारियों को तैनात करने से जुड़ा आदेश पत्र भी बुधवार को जारी कर दिया गया है. बंगले में लगे फल और सब्जियों को तोड़ने पर पाबंदी लगा दी गई है.

वहीं, सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता डॉक्टर अजय आलोक का कहना है कि पूर्व सीएम स्तरहीन राजनीति कर रहे हैं.

उनका कहना है, "उस जगह की एक-एक चीज सरकारी है. मांझी खुद सीएम रह चुके हैं. उनको पता होना चाहिए कि वहाँ जो भी फल टूटते हैं उसपर सरकार का हक़ होता है."

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