'पहले कहा गर्मी से मरे अब कहते हैं नहीं मरे'

  • 8 जून 2015
चंदू के बीवी और बच्चे
Image caption गर्मी में बीमार होकर मरे चंदू के बीवी और बच्चे असहाय स्थिति में हैं

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से 55 किलोमीटर दूर नंदीगामा में ग़रीबी की रेखा से नीचे रहने वालों की बस्ती है 'डीवी आर' कॉलोनी.

इस कॉलोनी में सुबह के वक़्त 'देवल' यानी मंदिर से सुप्रभातम का उद्घोष हो रहा है.

लेकिन यहाँ रहने वाली धनलक्ष्मी के लिए यह नई सुबह केवल परेशानियों का ही सबब है.

उनके पति गोपू चंद्रैय्या उर्फ़ चंदू उन 3000 हज़ार लोगों में शामिल थे जिनकी भीषण गर्मी से मरने की घोषणा आन्ध्र प्रदेश सरकार ने की थी. लेकिन अब सरकार कह रही है चंदू गर्मी से नहीं मरे.

धनलक्ष्मी कहती हैं कि जब इस इलाके में पारा 47 डिग्री पार कर रहा था उसी दौरान चंदू को लू लग गयी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनकी मौत हो गई.

खाने के पड़े लाले

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चंदू ही क्यों इनके जैसे 1200 से ज़्यादा लोगों के बारे में सरकार कह रही है कि ये लोग गर्मी से नहीं मरे.

धनलक्ष्मी के पति 25 वर्षीय गोपू चंद्रैय्या उर्फ़ चंदू फेरी लगाकर छातों की मरम्मत का काम करते थे.

चंदू को मरे कुछ ही दिन हुए हैं और इस परिवार के सामने खाने के भी लाले पड़ गए हैं.

Image caption चंदू छातों की मरम्मत का काम करते थे.

तीन बच्चों और बूढ़ी सास के साथ धनलक्ष्मी सिर्फ उबले हुए चावल बच्चों को खिला रहीं हैं.

बीते महीनों में भारी लू से कई मौत की ख़बरों के बाद आन्ध्र प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि वो मृतकों के परिवार वालों को एक लाख रुपए का मुआवज़ा देगी.

मगर जब चंदू के परिवार ने मुआवज़े के लिए सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें वापस कर दिया. उन्हें कहा गया कि चंदू की मौत लू लगने से हुई मौत नहीं मानी जा सकती.

पोस्टमार्टम ज़रूरी

ऐसा इसलिए क्योंकि लाश का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया था.

चंदू के परिवार वालों का कहना है, "हम अनपढ़, ग़रीब लोग हैं. हमें मालूम नहीं था कि हमें पोस्टमार्टम भी करवाना होगा. सरकारी अस्पताल में रिकॉर्ड मौजूद है कि उनकी मौत किस तरह हुई. मगर अभी तक वे हमें मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दे रहे हैं."

मृत्यु का प्रमाण पत्र काफ़ी मायने रखता है क्योंकि इसके बिना विधवा पेंशन और सस्ता अनाज तक नहीं मिलते.

नंदीगामा में रहने वाले वकील करीमुल्लाह का कहना है कि सरकार प्रक्रिया को पेचीदा बना रही है ताकि उसे कम मुआवज़ा देना पड़े या फिर बिल्कुल ही न देना पड़े.

लू से मौत पर सवाल

यहाँ की तहसीलदार लक्ष्मी प्रसन्ना लू लगने से सिर्फ एक मौत की पुष्टि करती हैं और वो मौत भी चंदू की नहीं है.

Image caption नंदिगामा की तहसीलदार लक्ष्मी प्रसन्ना.

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चूँकि सरकार ने गर्मी से मरने वालों के मुआवज़े की रक़म को बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया है, इसलिए लोग सामान्य मौत को भी गर्मी से हुई मौत बता रहे हैं.

तहसीलदार लक्ष्मी प्रसन्ना कहती हैं, "हमारे यहाँ स्थानीय थाने के प्रभारी, सरकारी डाक्टर और तहसीलदार की एक समिति गवाहों और पंचायत के सदस्यों के बयान के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करती है."

इसका सत्यापन भी समिति ख़ुद ही करती है. लेकिन धनलक्ष्मी अपना आवेदन ले कर सरकारी दफ़्तरों के चक्कर काट रही हैं.

मगर तहसील के कर्मचारियों का कहना है कि चंदू की मौत के प्रमाणपत्र के लिए उनसे किसी ने संपर्क ही नहीं किया है.

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