'दुनिया इस यात्रा का पोस्टमार्टम करेगी'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय बांग्लादेश यात्रा के आखिरी दिन बांग्लादेश में प्रवासी भारतीयों के समूह को संबोधित किया.

उन्होंने लैंड बिल एग्रीमेंट को दिलों को जोड़ने वाला समझौता बताया तो बांग्लादेश के विकास पर ख़ुशी भी जताई. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की स्थायी सदस्या का मुद्दा भी उठाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत ने 1971 की जंग का ज़िक्र करते हुए कहा, "भारत के कब्ज़े में पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिक थे लेकिन हिंदुस्तान का चरित्र देखें, हमने बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान पर गोलियां चलाने के लिए नहीं किया. हमने सैनिक वापस भेज दिए."

मोदी ने कहा, "आज हर छठा व्यक्ति भारतीय है. लेकिन देखिए आज उस भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए तरसना पड़ रहा है. हमें (ग़रीब देशों को) मिल बैठकर एक होकर लड़ाइयां लड़नी पड़ेंगी. हम झुकने वाले नहीं हैं."

प्रधानमंत्री ने कहा, "इस दो दिन की यात्रा के बाद एशिया ही नहीं पूरा विश्व बारीकी से इसका पोस्टमार्टम करेगा. तराजू लेकर बैठेंगे क्या खोया क्या पाया. एक वाक्य में मैं कहूंगा- लोग सोचते थे हम पास-पास हैं. अब दुनिया को स्वीकार करना पड़ेगा, हम पास-पास भी हैं, साथ-साथ भी हैं."

प्रधानमंत्री के संबोधन की 10 ख़ास बातें

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1. इमोशनल अटैचमेंट- मेरे राजनीतिक जीवन में, जिनकी उंगली पकड़कर चलना सीखा, उन अटल बिहारी वाजपेयी को बांग्लादेश ने विशेष सम्मान दिया है.

2. तरक्की पर ख़ुशी- चीन में एक कंपनी के सीईओ ने मुझसे पूछा कि आप सवा सौ करोड़ का देश हो, आप क्या कर रहे हो. आपके पड़ोस में 17 करोड़ का देश कपड़ा उद्योग में विश्व में दूसरे स्थान पर है.

दिल से कहता हूं मुझे इतना आनंद आया- इतना आनंद आया....आनंद इस बात का था कि विकासशील देश की सीमा में रहने वाला हमारा साथी, हमारा पड़ोसी इतना पराक्रम करे तो आनंद आना स्वाभाविक है.

3. बांग्लादेश से सबक- इन्फेंट मौर्टेलिटी रेट, गर्ल चाइल्ड के मामले में भारत के कई राज्य बांग्लादेश से सीख सकते हैं.

4. लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट- यह सिर्फ़ ज़मीन का समझौता नहीं है. दो-चार किलोमीटर इधर-उधर की बात नहीं है, यह दिलों को जोड़ने वाला समझौता है.

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सारे युद्ध ज़मीन के लिए हुए हैं. लेकिन हम दो देशों ने ज़मीन समझौते को ही संबंध बनाने का सेतु बना देते हैं.

5. नोबेल- समृद्ध देशों की गतिविधियों की चर्चा बहुत होती है. हम जैसे गरीब देशों की नहीं.

यह घटना (लैंड बिल एग्रीमेंट) कहीं और होती तो नोबेल पुरस्कार की बातें होने लगतीं. हमें कोई नहीं पूछेगा क्योंकि हम गरीब देश हैं.

6. तीस्ता जल समझौता- तीस्ता के पानी बंटवारे को लेकर मिलकर, मानवीय मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ेंगे.

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7. ओशियनोग्राफ़ी- ओशियनोग्राफ़ी में भारत ढाका विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करेगा. इतना सारा पानी है जिसे हम ताकत बना सकते हैं- ब्लू इकोनॉमी. समंदर से घिरे देश इस विषय में बहुत कुछ कर सकते हैं.

8. कनेक्टिविटी- बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और भारत ने कनेक्टिविटी की रूपरेखा तय कर ली है.

बांग्लादेश भारत न सिर्फ़ रेलमार्ग, सड़कमार्ग, वायुमार्ग और अब समुद्री मार्ग से भी जुड़ेंगे. अब तक वाया सिंगापुर सामान आता-जाता था लेकिन अब आमने-सामने होगा.

9. बिजली- त्रिपुरा में लगाए गए पावर प्लांट से भारत ने बांग्लादेश को पांच सौ मेगावाट बिजली देने का वायदा किया था. इसमें से एक सौ मेगावाट बिजली दी जाने लगी है.

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कल (शनिवार को) हमने समझौता किया है, अब भारत 1000 मेगावाट बिजली बांग्लादेश को देगा.

10. बंगबंधु सैटेलाइट- प्रधानमंत्री (शेख हसीना) चाहती हैं कि बांग्लादेश एक बंगबंधु सैटेलाइट लॉंच करे. हमने बांग्लादेश के स्पेस कार्यक्रम में मदद का प्रस्ताव दिया है. भारत इस क्षेत्र में अपनी ताकत दुनिया के सामने स्थापित कर चुका है- बांग्लादेश को उसका फ़ायदा मिलना चाहिए.

भारत 2016 तक सार्क सैटेलाइट लॉंच करेगा जिसका फ़ायदा बांग्लादेश को भी मिलेगा.

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