कश्मीरः पुलिस की बंदूक छीन रहे हैं नौजवान

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भारत प्रशासित कश्मीर के बडगाम ज़िले के पाखेरपोरा गांव में जून 2014 में दो नौजवान लड़कों ने एक पुलिस वाले पर हमला कर दिया.

उन दोनों के पास कोई हथियार नहीं था फिर भी वे पुलिसकर्मी को घायल करने और उसकी राइफ़ल छीनने में कामयाब हुए.

इनमें से एक युवक शकील अहमद वानी भारतीय फ़ौज के साथ इस साल दक्षिणी कश्मीर में जंगल में हुई मुठभेड़ में मारा गया.

पत्रकार रह चुके शकील ने जब चरमपंथी बनने का फ़ैसला किया तो उसे इसके लिए हथियार की भी ज़रूरत थी.

बदले हालात

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शकील ने जो किया वो कश्मीर में पहली बार नहीं हुआ है. पिछले दो-तीन साल में पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हथियार छीनने के कई मामले दर्ज किए गए हैं.

मई 2015 के आख़िरी हफ़्ते में एक ऐसी ही घटना भारत प्रशासित कश्मीर के दक्षिणी ज़िले शोपियां में हुई. तब सरताज अहमद नामक एक पुलिस वाले से अज्ञात हमलावरों ने राइफ़ल छीन ली और उन्हें घायल कर दिया था.

दक्षिणी कश्मीर में एक हफ़्ते से कम वक़्त में यह तीसरी घटना थी.

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पुलिस के एक आला अधिकारी का कहना है कि चरमपंथी गुटों में शामिल होने की शर्तें पिछले कुछ सालों में बदल गई हैं.

उन्होंने बताया कि 1990 के दशक से लेकर पिछले दो-तीन साल पहले तक जो भी व्यक्ति चरमपंथी गुट से जुड़ना चाहता था, उन्हें हथियार और प्रशिक्षण सीमा पार से मिलता था, लेकिन अब चीज़ें बदल गई हैं.

घुसपैठ रुकने का असर

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जम्मू कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल सैयद जावेद मुज्तबा गिलानी का कहना है कि सुरक्षाबल सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकने में बहुत हद तक कामयाब हुए हैं. इसलिए चरमपंथी गुटों में शामिल होने वाले नए चरमपंथियों को सीमापार से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है.

गिलानी कहते हैं, "जबसे हमने घुसपैठ रोकने में कामयाबी हासिल की है, तब से चरमपंथी गुटों में आने वाले नए सदस्यों के पास कोई विकल्प नहीं रह गया है सिवाय इसके कि वे अपने लिए हथियार का इंतज़ाम ख़ुद करें. इसलिए बंदूक छीनने के इरादे से हमारे कई जवानों पर हमले हुए हैं.''

एक पूर्व चरमपंथी कमांडर और अब हुर्रियत के नेता शाहिद-उल-इस्लाम का कहना है कि घाटी में हथियारबंद विद्रोह के शुरुआती दिनों में हथियार छीनने वाला एक गुट हुआ करता था.

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उन्होंने बताया, "उन दिनों अल्लाह टाइगर नाम का चरमपंथी समूह हुआ करता था जो पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की बंदूकें छीनता था लेकिन उसके ज़्यादातर लड़कों को पाकिस्तान से हथियार मिलते थे."

हथियार छीनने की ऐसी कई घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि चरमपंथियों की ये नई जमात सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है.

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