रफ़ाएल पर पर्रिकर की कभी हां, कभी ना

रफ़ाएल इमेज कॉपीरइट AP

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के विरोधाभासी बयानों के बाद भारतीय वायु सेना की 36 फ़्रांसीसी लड़ाकू विमानों की ख़रीद पर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में जब 36 रफ़ाएल विमानों की तैयार स्थिति में ख़रीद की घोषणा की तो उसके तीन दिन बाद, 13 अप्रैल को पर्रिकर ने घोषणा की कि बाक़ी के विमानों की ख़रीद भी उसी ढंग से की जाएगी.

मोदी की आश्चर्यजनक घोषणा ने 126 विमानों को लेकर जनवरी 2012 से ही रक्षा मंत्रालय और विमान निर्माता कंपनी दसौ के बीच चल रही बातचीत को पीछे छोड़ दिया.

उस सौदे के तहत भारत को 18 लड़ाकू विमान तैयार हालत में मिलने थे और बाक़ी 108 विमानों के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को निर्माण लाइसेंस मिलना था.

तेजस पर दांव

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption भारत के अंदर बना हल्का लड़ाकू विमान तेजस.

16 अप्रैल को पर्रिकर ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, "और अधिक रफ़ाएल विमानों की ज़रूरत पड़ सकती है लेकिन उन्हें कैसे लेना है, इस बारे में विचार करने की ज़रूरत है."

लेकिन 11 मई को उन्होंने एक यूटर्न ले लिया.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मूल बात ये है कि रफ़ाएल सौदे को 36 विमानों यानी दो स्क्वाड्रनों तक ही सीमित किया गया है."

उसके बाद 21 मई को मीडिया में पर्रिकर ने दोहराया कि भारत न तो लाइसेंस के तहत बनने वाले अतिरिक्त विमान लेगा और न ही 36 से ज़्यादा लड़ाकू विमान ख़रीदेगा.

उन्होंने कहा कि क़रीब 90 विमानों को हासिल करने के एवज में भारत जो धन बचाएगा, उससे देश में ही बने 200 हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ खरीदे जाएंगे.

उन्होंने घोषणा की कि भारतीय वायु सेना में तेज़ी से कम हो रहे लड़ाकू विमानों की कमी को तेजस पूरा करेगा.

लेकिन 26 मई को पर्रिकर ने फिर यूटर्न ले लिया.

विरोधाभासी बयान

इमेज कॉपीरइट EPA

उन्होंने स्पष्ट करने से इनकार करते हुए बड़े रहस्यमय ढंग से कहा, "मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि हम और रफ़ाएल विमान ख़रीदेंगे. मैं ये भी नहीं कह रहा हूँ कि हम और (विमान) नहीं ख़रीदेंगे."

हालांकि 31 मई को वो अधिक निर्णयात्मक दिखे.

पर्रिकर ने कहा, "हम बाक़ी (90 रफ़ाएल) नहीं ख़रीद रहे हैं. हम केवल 36 रफ़ाएल विमान सीधे ख़रीद रहे हैं."

अधिकारियों का कहना है कि 36 विमानों को लेकर रक्षा मंत्रालय और कपंनी दसौ के बीच दिल्ली में जल्द बातचीत शुरू हो जाएगी और कुछ महीने में ही सौदा पक्का हो जाएगा.

पर्रिकर ने घोषणा की कि भारत प्रतिस्पर्द्धात्मक क़ीमत पर सात अरब डॉलर (करीब 44,869 करोड़ रुपये) में 36 विमान ख़रीद रहा है.

उन्होंने कहा कि इन विमानों की आपूर्ति अगले दो सालों में हो जाएगी.

सौदे की शर्तें

इमेज कॉपीरइट Reuters

पर्रिकर ने यह भी कहा कि विमानों की क़ीमत का 50 प्रतिशत धन भारत में अनिवार्य रूप से निवेश करना होगा.

इस तरह के समझौते के तहत दसौ को भारत के रक्षा क्षेत्र, नागरिक उड्डयन या आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों में पूरे सौदे की आधी राशि निवेश करनी होगी.

जनवरी 2012 में भारतीय वायुसेना ने 126 लड़ाकू विमान ख़रीदने के लिए जो टेंडर जारी किए थे उसमें दो कंपनियों को चुना गया था और अंत में रफ़ाएल सबसे आगे रहा.

इसका प्रतिद्वंद्वी लड़ाकू विमान था यूरोफ़ाइटर.

दसौ की क़ीमत कम थी इसलिए रक्षा मंत्रालय ने सौदे की बातचीत शुरू कर दी.

लेकिन बढ़ती क़ीमत और विमान बनाने के लिए एचएएल को तकनीक देने में नौकरशाही की दिक़्क़तों के चलते यह मामला उलझ गया.

दसौ ने एचएएल में बनने वाले 108 विमानों की ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दिया.

ज़रूरत

इमेज कॉपीरइट EPA

सौदे में यह भी एक बड़ी अड़चन थी, लेकिन मोदी ने 36 विमानों की सीधी ख़रीद की घोषणा कर इसे दूर कर दिया.

भारतीय वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन की अनुमति है लेकिन उसके पास मौजूदा समय में 35 स्क्वाड्रन हैं, इसलिए वह रफ़ाएल को जल्द से जल्द सेवा में लाना चाहती है.

बीते 27 अप्रैल को रक्षा मामलों पर गठित संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2022 तक लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 25 हो जाएगी, जो कि परमाणु हथियार संपन्न प्रतिद्वंद्वी चीन और पाकिस्तान की तुलना में बहुत कम है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार