राजस्थान में सस्ते हुए तम्बाकू उत्पाद

  • 16 जून 2015
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राजस्थान सरकार ने बीड़ी को छोड़कर अन्य तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स घटाकर 65 से 45 प्रतिशत कर दिया है. पान मसालों पर इसे 35 प्रतिशत कर दिया गया है.

हालांकि कुछ समय पहले तक देश में तम्बाकू पर सबसे ज़्यादा टैक्स राजस्थान में था. इस कारण राज्य को विश्व स्वास्थ्य संगठन दो बार पुरस्कृत कर चुका है.

सिगरेट पर टैक्स संख्या के आधार पर तय किया गया है, जैसे 60 मिलीमीटर से अधिक पर 65 मिलीमीटर से कम लम्बाई वाली सिगरेट पर प्रति हज़ार सिगरेट 500 रुपए टैक्स देना होगा.

राजस्थान वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन के अमोल राय के अनुसार यह साफ़ ज़ाहिर है कि राजस्थान सरकार ने ऐसा नामी सिगरेट कंपनियों की 'ज़बरदस्त दखलंदाज़ी' की वज़ह से किया है.

संख्या का नियम

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अमोल राय कहते हैं कि सरकार ने चुपके से गत वर्ष सितम्बर में सिगरेट पर 65 प्रतिशत कर के नियम को तोड़कर संख्या का नियम लागू किया.

अभी तक सरकार को तम्बाकू और अन्य धूम्र उत्पादों पर 65 प्रतिशत टैक्स से करीब 750 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व हासिल हो रहा था.

पहले यदि एक सिगरेट पर सरकार को पांच रुपए की आय होती होगी तो अब सिर्फ 35 पैसे मिलेंगे.

इस क़दम से ना केवल राजस्व घटेगा बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक ख़र्च का भार बढ़ेगा.

इस वर्ष मार्च में ही विधान सभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने माना था कि तम्बाकू और अन्य धूम्र उत्पादों से हो रही आय से कहीं ज्यादा 1160 करोड़ रुपए इनसे होने वाली बीमारियों पर हो रहा है.

आदेश का विरोध

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राज्य के स्वास्थ्य संगठनों ने सरकार के इस आदेश का ज़ोरदार विरोध किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे 'तुगलकी फ़रमान' बताते हुए कहा, “लगता है कि सरकार तम्बाकू व्यवसायियों के कथित हित में अघोषित अभियान चलाने वाले भाजपा सांसदों की समूह का एक हिस्सा बन गयी है.”

राजस्थान वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर दिन लगभग 250 नए तम्बाकू उपभोक्ता तैयार हो रहे हैं.

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प्रतिवर्ष करीब 72,000 राजस्थानी आबादी तम्बाकू के कारण असमय मौत का शिकार हो जाती है.

पूर्व में जॉन होपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, अमरीका के एक अध्ययन के अनुसार तम्बाकू पर कर बढ़ने से राज्य में होने वाली अकाल मृत्यु में 2.3 प्रतिशत की गिरावट की बात कही गयी थी.

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