भारत में स्केटबोर्डिंग की लंबी छलांग

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Image caption स्केटबोर्डर अभिषेक 'शैकेनबेक' का कहना है कि इस खेल में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है.

भारत जैसे क्रिकेट के जुनूनी देश में कुछ साल पहले तक स्केटबोर्डिंग का अस्तित्व नहीं के बराबर था.

लेकिन अब यहां 15 से ज्यादा स्केट पार्क है जिनकी संख्या वर्ष 2009 में सिर्फ तीन थी.

पिछले साल भारत में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्केट टूर और प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें भारत और बाहर के देशों से 60 स्केटबोर्डर्स ने भाग लिया.

फ़ोटोग्राफ़र हरी अदीवारेकर ने इनमें से स्केटबोर्डिंग करने वाले कुछ नए सदस्यों से मुलाकात की.

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Image caption कल्याण राईती जो राष्ट्रीय स्तर के सर्फर हैं और पार्ट-टाइम स्केटर भी है, गोवा के समुद्री तट पर स्केटिंग का प्रयास करते हुए.
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Image caption दुकान में सेल्समैन का काम करने वाले अनीश क्रिस्टोफर का कहना है कि स्केटिंग उनकी ज़िंदगी है. कई बार घायल होने के बावजूद वे टूर में भाग लेने के लिए जोश से भरे हुए हैं.
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Image caption शेकेनबेक के मुताबिक़, "हममें से अधिकांश आड़ी तिरछी और उबड़ खाबड़ सड़कों पर स्केटिंग करते हैं. ये इस खेल को और ख़तरनाक़ बना देता है."
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Image caption भारत में अधिक स्केटिंग पार्क खुलने से नौजवानों का रूझान इस तरफ बढ़ रहा है.
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Image caption ब्रिटॉन निक स्मिथ को कुछ लोग भारत में स्केटबोर्डिंग का गॉडफादर मानते हैं. उन्होंने भारत का पहला स्केट पार्क गोवा में वर्ष 2003 में बनाया था. ये पार्क विवादित ज़मीन पर है इसलिए स्केटर्स को यहां आने से रोक दिया गया है.
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Image caption ऑस्ट्रेलिया के डीन पाल्मर पिछले साल बंगलौर में हुए पहले अंतरराष्ट्रीय स्केट टूर और प्रतियोगिता में आकर्षण का केंद्र थे.
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Image caption सागर बाघेला और उसके दोस्त मुंबई में पले पढ़े हैं और वहीं की सड़कों पर स्केटिंग करना सीखे हैं. आज वे उभरती प्रतिभाओं में से हैं.

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