सचिन से भारत रत्न वापस लेने की अर्ज़ी

  • 20 जून 2015
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर के ख़िलाफ एक जनहित याचिका स्वीकार की है.

याचिका में उन पर भारत रत्न के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है.

याचिका के अनुसार सचिन भारत रत्न सम्मान का ग़लत इस्तेमाल कर ‘व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार के ज़रिए पैसा कमा रहे हैं’.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस के के त्रिवेदी की खंडपीठ ने इसे मंज़ूर करते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल से पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मामलों में कोई दिशा-निर्देश दिए हैं.

उन्हें इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी.

'पैसा कमा रहे हैं'

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यह याचिका भोपाल के रहने वाले वीके नासवाह ने दायर की है.

नासवाह ने कहा, “सचिन ने देश के लिए खेलते हुए बहुत नाम कमाया है. लेकिन अब वो देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न की ‘प्रतिष्ठा’ का इस्तेमाल कर विभिन्न उत्पादों का प्रचार कर पैसा कमा रहे हैं. ये उस सम्मान की मर्यादा और सिद्धांतों से मेल नहीं खाता है.”

नासवाह ने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि सचिन के व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए या नैतिकता के नाते उन्हें इस पुरस्कार को लौटा देना चाहिए. 'अगर वह ऐसा नही करते है तो केंद्र सरकार को उनसे सम्मान वापस ले लेना चाहिए.'

सचिन अभी 12 उत्पादों का प्रचार कर रहे है.

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