घर बैठे ऑक्सफ़र्ड, हार्वर्ड से पढ़ाई?

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ऑक्सफ़र्ड, हार्वर्ड, एमआईटी, आईआईटी सहित दुनिया भर के बड़े से बड़े से विश्वविद्यालयों की पढ़ाई आप घर बैठे कर सकते हैं, ये सुनकर अगर आपके मन में कौतूहल और चेहरे पर मुस्कान है तो बीबीसी की ये ख़ास पेशकश आपके लिए ही है.

ये ख़बर है MOOCs यानी मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज़ के बारे में. इसकी पहली कड़ी में मिलिए अनंत अग्रवाल से जिन्हें भारत ही नहीं दुनियाभर में ऐडैक्स (Edx) के ज़रिए MOOCs की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है.

पढ़िए बीबीसी से उनकी पूरी बातचीत-

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Image caption अनंत अग्रवाल, सीईओ, ऐडैक्स.

भारत में MOOCs के बारे में अभी ज़्यादा जानकारी नहीं है. ओपेन कंटेट क्या होता है इस बारे में कुछ बताएँ?

ओपेन कंटेट का मतलब है इंटरनेट पर मौजूद ऐसी जानकारी या पाठ्य सामग्री जो कहीं भी किसी भी यूज़र के लिए मुफ़्त (या बेहद कम क़ीमत पर) उपलब्ध हो. इंटरनेट यूज़र अपनी ज़रूरत के हिसाब से उसका प्रयोग कर सकता है और कई मामलों में उसमें बदलाव भी कर सकता है. ये एक तरह से शिक्षा को पब्लिक-प्रॉपर्टी की तरह समझने जैसा है.

MOOCs यानी मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज़, ऐडैक्स (Edx) और इस तरह की दूसरी वेबसाइट्स (Coursera, Udacity, Swayam) पर उपलब्ध हैं. इनके ज़रिए ई-लर्निंग के कई नए तरीक़े अब विकसित हो रहे हैं जैसे सेल्फ़-लर्निंग, ऑनलाइन डिस्कशन ग्रुप्स या विकीपीडिया आधारित कोलैबोरेटिव लर्निंग यानी दुनियाभर में बैठे लोगों के साथ मिलजुलकर की जानी वाली पढ़ाई.

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आमतौर पर किस तरह के कोर्स उपलब्ध हैं?

कंप्यूटर एनेलेटिक्स, समाज-विज्ञान, समाज-शास्त्र, विश्व की बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का लेखा-जोखा, मनोविज्ञान, डाटा-साइंस, ब्रेन-साइंस, अर्थशास्त्र के सिद्धांत, मौसम-विज्ञान, शायद ही कोई विषय ऐसा हो जिस पर MOOCs उपलब्ध नहीं. चार से दस हफ़्तों का कोर्स पूरा करने पर आपको बड़े से बड़े विश्वविद्यालय का सर्टिफ़िकेट भी मिलता है.

भारत में इन पाठ्यक्रमों को कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?

ऐडैक्स (Edx) पर कुल 40 लाख ऑनलाइन लर्नर्स हैं जिनमें से चार लाख भारत से हैं. यानी अमरीका के बाद भारत ऐडैक्स के ज़रिए MOOCs का प्रयोग करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.

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भारत में डिज़िटल तकनीक की जो स्थिति है उसे देखते हुए क्या MOOCs की पहुंच एक ख़ास वर्ग तक ही है?

ऑनलाइन कोर्स पढ़ने के लिए डेस्कटॉप या लैपटॉप जैसे डिवाइस के साथ इंटरनेट की भी ज़रूरत होती है. समय के साथ भारत में इन चीज़ों तक लोगों की पहुँच लगातार बढ़ रही है. इस बीच हम नई कोशिशें भी कर रहे हैं जैसे मोबाइल ऐप्स के ज़रिए MOOCs.

हमने अभी ऐडैक्स (Edx) का मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जिसकी मदद से आप कोर्स डाउनलोड करके इंटरनेट के बिना भी जब चाहें जहाँ चाहें उन्हें देख-सुन-पढ़ सकते हैं.

भारत में इस समय जितने छात्र हैं, शिक्षा संस्थान उनकी ज़रूरत पूरा नहीं कर सकते. देशभर में ऐसे छात्र हैं जो प्रतिभावान हैं और उन्हें बस एक मौक़ा चाहिए. जिन छात्रों की पहुंच बेहतरीन स्कूल-कॉलेजों तक नहीं है उनके लिए MOOCs एक बेहतरीन विकल्प हैं.

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भारत में आप किन संस्थानों के साथ जुड़े हैं?

ऐडैक्स (Edx) ने भारत में आईआईटी बॉम्बे, आईआईएम बंगलुरु और बिट्स पिलानी जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की है. इनके कोर्स अब हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं.

MOOCs के ज़रिए लोगों को रोज़गार मिले इसके लिए हमने भारत की प्रमुख एम्प्लॉयबिलिटी सॉल्युशन कंपनी एसपाइरिंग माइंड्स के साथ क़रार किया है.

कोशिश है कि रोज़गार खोजने वाले और रोज़गार देने वाले दोनों की ज़रूरतें पूरी हों. उसी के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार किए जाते हैं.

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क्या भारतीय भाषाओं जैसे हिन्दी या बांग्ला में भी MOOCs उपलब्ध हैं? इसमें क्या संभावनाएँ हैं?

दुनिया का पहला हिन्दी-अंग्रेज़ी MOOC ऐडैक्स (Edx) ने ही उपलब्ध कराया. भारत के इतिहास और समाज-विज्ञान पर आधारित 'एंगेजिंग इंडिया' नाम का ये कोर्स 10 हफ़्ते का है. इसे भारत में विशेषज्ञों की मदद से ही तैयार किया गया. इसके अलावा एक कोर्स है, "डाटा एनालसिस टू द मैक्स".

अंग्रेज़ी में उपलब्ध कोर्स में हम आमतौर पर लिखित कैप्शन भी दिखाते हैं जिससे अनुवाद में आसानी हो. हम दुनिया भर के छात्रों को ध्यान में रखते हुए अन्य भाषाओं में कोर्स प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं.

उम्मीद है भविष्य में भारतीय भाषाओं में और भी कोर्स उपलब्ध होंगे.

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आपने आईआईटी मद्रास से पढ़ाई की और फिर अमरीका गए. आप भारत की शिक्षा व्यवस्था को समझते हैं. क्या आपको लगता है कि भारत में डिग्रियों को ज़्यादा अहमियत दी जाती जबकि ज़रूरत हुनर और समझ की है?

डिग्रियों की अपनी एहमियत है. MOOCs इन डिग्रियों का वज़न और बढ़ाने का ज़रिया हैं. आने वाले दिनों में ऑनलाइन कोर्स आपको नौकरी दिलाएंगे और इंटरव्यू में काम आएंगे. डिग्रियां अपनी जगह हैं लेकिन MOOCs एक नई क्रांति है.

(MOOCs पर बीबीसी की अगली कड़ी में पढ़िए कहानी उन नौजवानों की जिन्होंने एक नई सोच के ज़रिए अपनी ज़िंदगी बदल दी)

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