पत्रकार के परिवार ने ख़त्म की भूख हड़ताल

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उत्तर प्रदेश में मृतक पत्रकार जगेंद्र सिंह के परिजनों ने अपनी दो हफ़्ते लंबी भूख हड़ताल ख़त्म कर दी है.

शाहजहांपुर में पत्रकार की मौत बुरी तरह जलने से हो गई थी. इस मामले में छह लोगों पर एफ़आईआर हुई जिनमें यूपी सरकार के एक मंत्री भी शामिल हैं.

मुख्यमंत्री अखिलेश कुमार यादव ने 30 लाख रुपए का मुआवज़ा, परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी और 'निष्पक्ष' जांच का आश्वासन दिया जिसके बाद उनके परिजनों ने भूख हड़ताल ख़त्म की.

जगेंद्र का परिवार मंत्री पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर 16 जून से धरने पर बैठा था.

मांग हुई पूरी

जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "हमारी तीन मांगे थीं, आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और निष्पक्ष जांच. मुख्यमंत्री ने हमारी तीनों मांगें मान ली. हम खुश हैं कि मुख्यमंत्री ने हमारी परवाह की."

परिजनों से मिलने के बाद मुुख्यमंत्री अखिलेश कुमार यादव ने कहा, "मामले की जांच बरेली डीआईजी को सौंप दी गई है. जो दोषी हैं उन्हें सज़ा होगी. परिजनों को पर्याप्त सुरक्षा भी दी जाएगी."

अखिलेश यादव ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया. पत्रकार की मौत मामले में मंत्री राममूर्ति वर्मा सहित कुछ पुलिसकर्मी भी अभियुक्त हैं.

आश्वासन पर भरोसा

मृतक पत्रकार के बेटे राहुल ने कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा है कि दोषियों को गिरफ़्तार किया जाएगा और बिना किसी पक्षपात के मामले में कार्रवाई होगी.

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राहुल ने बताया, "30 लाख रुपए की आर्थिक मदद, दो भाइयों को सरकारी नौकरी और मेरी मां को पेंशन का आश्वासन दिया गया है."

एक जून को जगेंद्र सिंह के घर पर पुलिस का छापा पड़ा था. इसके बाद आग से बुरी तरह से झुलसे हुए जगेंद्र सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया.

बताया जा रहा है कि जगेंद्र सिंह ने ग़ैर-क़ानूनी खनन और ज़मीन हड़पने के बारे में रिपोर्ट 'फेसबुक' पर पोस्ट की थी.

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