अन्ना हजारे की संस्था को 'सरकारी नोटिस'

  • 26 जून 2015
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Image caption अन्ना हजारे ने लोकपाल की मांग को लेकर साल 2011 में दिल्ली में अनशन किया था.

महाराष्ट्र के पुणे के चैरिटी के डिप्टी कमिश्नर ने 16 संस्थाओं को नोटिस जारी किया है.

इन संस्थाओं को कहा गया है कि वो अपने नाम से 'भ्रष्टाचार निर्मूलन' शब्द हटा लें.

अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार निर्मूलन का काम केवल सरकार का है और इन संस्थाओं को यह काम करने का अधिकार नहीं है.

चैरिटी के डिप्टी कमिश्नर शिवकुमार डिगे ने यह नोटिस अप्रैल में ही भेजा था.

लेकिन यह मुद्दा अब गरमाया है क्योंकि अन्ना हजारे की संस्था 'भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन' को भी यह नोटिस भेजने की बात सामने आई है.

खुद अन्ना का कहना है कि उन्हें फिलहाल यह नोटिस नहीं मिला है लेकिन वे इस मामले में कोर्ट तक जा सकते हैं.

'अनुचित प्रभाव'

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शिवकुमार डिगे ने बीबीसी हिंदी को कहा, "वास्तव में हाईकोर्ट का आदेश है कि सामाजिक उद्देश्य से स्थापित संस्थाएं शैक्षिक, सामाजिक अथवा धार्मिक काम कर सकती है. भ्रष्टाचार निर्मूलन का काम इसमें नहीं आता इसलिए उन्हें इससे दूर रहना चाहिए."

महाराष्ट्र सरकार ने जो नोटिस दिया है उसमें लिखा है, "इस प्राधिकरण ने पाया है कि कई संस्थाएं भ्रष्टाचार निर्मूलन या एंटी-करप्शन का नाम लेकर कई सरकारी दफ़्तरों में जाती हैं और वहां अनुचित प्रभाव बनाने का प्रयास करती है. किसी भी संस्था का उद्देश्य भ्रष्टाचार निर्मूलन के नाम से दूसरों को पीड़ा देना नहीं हो सकता."

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'नहीं बदलेंगे नाम'

वहीं अन्ना हजारे का कहना है कि अगर उन्हें नोटिस मिल भी जाए तो भी वे अपनी संस्था का नाम नहीं बदलेंगे.

उन्होंने कहा, "सरकारी अधिकारियों को भले ही लगता हो कि भ्रष्टाचार निर्मूलन का काम सरकार का है लेकिन सरकार यह नहीं करती इसलिए हमें यह करना पड़ता है."

पुणे की अन्य एक संस्था 'राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी जनशक्ति' के अध्यक्ष हेमंत पाटिल का भी कहना है कि वे ऐसे किसी आदेश का पालन नहीं करेंगे.

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