'यही पाक के साथ होता तो खूब मज़े लेते'

  • 2 जुलाई 2015
बांग्लादेश के अख़बार प्रथम आलो में प्रकाशित ग्राफ़िक्स. इमेज कॉपीरइट Other
Image caption बांग्लादेश के अख़बार प्रथम आलो में प्रकाशित चित्र.

हाल ही में बांग्लादेश में हुई अंतरराष्ट्रीय वनडे सीरीज में भारत के हारने के बाद ढाका के एक अख़बार ‘प्रथम आलो’ में एक चित्र प्रकाशित हुआ, जिसने भारतीय मीडिया और क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है.

इसमें भारतीय टीम के सभी सदस्यों के सिर के आधे बाल साफ दिखाए गए हैं.

विराट कोहली और धोनी समेत भारतीय क्रिकेट टीम को जहां खड़ा दिखाया गया है उसके पीछे एक दुकान के पोस्टर पर लिखा है- ‘मेड इन बांग्लादेश मुस्तफ़िज कटर. यहां मिलता है.’

और भारतीय क्रिकेटरों के हाथ में एक बैनर है जिस पर लिखा है- 'हमने ट्राई किया, आप भी ट्राई करें.

हालिया एक दिवसीय क्रिकेट सीरीज़ में मुस्तफ़िज़ ने जिस अंदाज़ में भारत के बड़े बड़े विकेट लिए, उस धीमी गेंद को क्रिकेट की भाषा में 'कटर' भी कहा जाता है.

इस विज्ञापन को लेकर भारतीय मीडिया में हंगामा मच गया है.

चैनल आग बबूला

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हर भारतीय चैनल ने इस पर कुछ न कुछ टिप्पणी की और समचार चैनल एनडीटीवी ने इसे बियॉन्ड द बॉउंड्री (हद पार) तक कहा.

ज़ी न्यूज़ ने इसे भारतीय क्रिकेट का घोर अपमान क़रार दिया और इंडिया टुडे टीवी ने इसे ‘अरुचिकर’ कहा.

लेकिन ताज्जुब की बात है कि बहुत कम लोग हैं जो इसके व्यंग्यात्मक पहलू को पहचान पा रहे हैं.

एक तरह से कहा जाए तो भारतीय मीडिया इस पहलू को पहचान पाने में असफल रहा है.

वरिष्ठ खेल पत्रकार देबाशीष दत्ता कहते हैं, "वर्ल्ड कप के दौरान 19 मार्च को जब बांग्लादेश भारत के हाथों हारा. बांग्लादेश के लोगों को लगा कि आईसीसी चेयरमैन श्रीनिवासन ने अंपायर से साठगांठ कर भारत को जिताया है. यह ग्राफ़िक्स इसी ग़ुस्से का इज़हार है."

जड़ें कहीं और

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लेकिन कोलकाता के वरिष्ठ खेल पत्रकार गौतम भट्टाचार्या ने बीबीसी को बताया, “इस तस्वीर में अगर हद पार भी हुई है तो इसका कारण केवल क्रिकेट में नहीं बल्कि भारत-बांग्लादेश के संबंधों की जड़ में भी निहित है. बांग्लादेश के लोगों का मानना है कि पानी के बंटवारे जैसे मुद्दों पर भारत बड़े भाई की तरह धौंस जमाता है.”

उनका कहना है कि बांग्लादेशी अख़बार में छपी यह तस्वीर इसी आक्रोष का परिणाम है.

वैसे भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट को लेकर विज्ञापन युद्ध कोई नई बात नहीं है.

वर्ल्ड कप के दौरान भारत में जो 'मौका मौका' टीवी विज्ञापन बनाया गया था उसमें दावा किया गया था कि भारत ने ही बांग्लादेश को 'पैदा' किया था.

विज्ञापन युद्ध

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उसके जवाब में बांग्लादेशी क्रिकेट प्रशंसकों ने बहुत से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे.

और पिछले महीने जब भारतीय क्रिकेट टीम बांग्लादेश में खेलने गई तो भारत में एक टीवी विज्ञापन बनाया गया जिसमें बांग्लादेश को एक 'छोटा बच्चा' बताया गया था.

इसके जवाब में बांग्लादेश में 'बैंबू इज़ ऑन' (बांस तैयार) का विवादित विज्ञापन निकाला.

'प्रथम आलो; के खेल संपादक उत्पल शुभ्र ने बीबीसी से कहा, "अख़बार के इस साप्ताहिक अंक में हम राजनीतिक हस्तियों से लेकर क्रिकेट तक पर व्यंग्य कसते हैं. यह मूलतः व्यंग्य का अंक होता है. इसमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तक को नहीं बख़्शा जाता है, इसलिए इसका ग़लत अर्थ न निकाला जाए. यह विशुद्ध व्यंग्य है."

पाकिस्तान पर हुआ होता तो...

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एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ का कहना है, “यह तीखा व्यंग्य है जिसमें पर्याप्त सृजनशीलता है, अगर ये चित्र इंडिया को छोड़ किसी और क्रिकेटर को लेकर होता तो हम बहुत मजे लेते. अगर यह ऑस्ट्रेलिया को लेकर बना होता तो हम बहुत मज़े लेते और पाकिस्तान को लेकर बनता तो शायद दोगुना मज़े लेते.”

असल में भारत में क्रिकेट को धर्म और क्रिकेटरों को भगवान की हद तक सम्मान हासिल है.

इसलिए भारतीय क्रिकेटरों पर तंज कसने का मतलब भारतीय प्रशंसकों के लिए उनके भगवान पर तंज जैसा है.

और उनपर व्यंग्य में चाहे जितनी सृजनशीलता हो, यह स्वीकार नहीं है.

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