भारत ऐसे बच सकता है ग्रीस संकट से ...

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कर्ज़ की क़िस्त न चुका पाने के कारण ग्रीस का आर्थिक संकट गहरा गया है साथ ही कर्ज़दाताओं के लिए भी मुश्किल की घड़ी आन पड़ी है.

भारत के वित्त सचिव राजीव महर्षि ने कहा है कि ग्रीस के संकट का भारत पर भी असर पड़ सकता है और भारत से पूंजी बाहर जानी शुरू हो सकती है जिससे रुपए की क़ीमत भी गिर सकती है.

ग्रीस संकट के बारे में 10 अहम बातें

हालाँकि वित्तीय अख़बार फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस के संपादक सुनील जैन का कहना है कि यूरोपीय संकट का भारत पर असर तो पड़ेगा, लेकिन इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.

पढ़ें, सुनील जैन का विश्लेषण

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यह सोचना ग़लत होगा कि ग्रीस संकट के कारण रुपए की क़ीमत गिर जाएगी या विदेशी संस्थागत निवेशक (एफ़आईआई) अपना पैसा यहां से निकालने लगेंगे.

असल में इस संकट के शुरू होने के बहुत पहले ही एफ़आईआई ने ऐसा करना शुरू कर दिया था. सच तो यह है कि पिछले महीने देश में एफ़आईआई के मार्फ़त जो धन आया है वो पिछले 18 महीनों में सबसे कम है.

दूसरा ये कि अमरीका सितम्बर-अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है. ऐसे में चिंता जताई जा रही है कि बॉन्ड्स में निवेश करने वाले एफ़आईआई अपना पैसा निकालना शुरू कर देंगे.

अगर ग्रीस दिवालिया हो जाता है तो भारत की स्थिति और ख़राब होगी. यूरो के मुक़ाबले डॉलर मजबूत होगा तो रुपए में कमज़ोरी आएगी और एफ़आईआई निवेश में भी कमी आएगी.

लेकिन ये घटनाएं अचानक नहीं हुई हैं इसलिए भारतीय रिज़र्व बैंक और वित्तीय एजेंसियां इस संकट से निपटने की तैयारी कर रही हैं.

तैयारी

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पिछले एक साल से आरबीआई डॉलर की ख़रीदारी कर रहा है. आरबीआई को पता है कि अगर पैसा बाहर जाएगा, तो भी रुपया बिल्कुल धाराशायी नहीं हो होगा.

हमें सतर्क रहने की ज़रूरत है, घबराने की ज़रूरत नहीं है.

यूरोप की विकास दर पहले से ही बहुत खस्ताहाल है, उसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है.

ग्रीस संकट के बाद उसकी स्थिति और बिगड़ेगी. ऐसे में भारत से यूरोप को होने वाले निर्यात पर असर पड़ेगा, जिसका ग्राफ़ पहले से ही गिर रहा था.

इसका असर शेयर बाज़ार पर भी दिखेगा.

ग्रीस अगर यूरो ज़ोन से बाहर जाता है तो उसके बैंक बिल्कुल ठप पड़ जाएंगे.

इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्वाभाविक रूप से व्यापार पर भी पड़ेगा.

स्थिति बदल सकती है बशर्ते ...

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भारत पर दो तरह से इसका असर पड़ेगा. एक तो एफ़आईआई के रास्ते विदेशी मुद्रा बाहर जाएगी और दूसरे निर्यात भी प्रभावित होगा.

लेकिन अगर सरकार सुधारों में तेज़ी दिखाए तो इस संकट का उल्टा असर भी पड़ सकता है.

वैश्विक निवेशकों के लिए निवेश का सबसे बड़ा मौक़ा अमरीका लग रहा है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है.

पिछले कुछ समय से चीन की अर्थव्यवस्था भी कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है.

ऐसे में अगर मोदी सरकार कुछ बड़े सुधारों को आगे बढ़ाए, मसलन, गैस की क़ीमतें बढ़ा दी जाएं, टेलीकॉम सेक्टर को और खोल दिया जाए या कुछ बड़े रेलवे स्टेशनों का निजीकरण करने की हरी झंडी दे दी जाए तो वैश्विक निवेशकों की थैली भारत के लिए खुल जाएगी.

(सुनील जैन से बीबीसी संवाददाता सलमान रावी की बातचीत के आधार पर)

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