महाराष्ट्र: स्कूल न जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण

  • 4 जुलाई 2015

महाराष्ट्र में पहली बार स्कूल न जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण किया जाएगा. एक दिन का यह सर्वेक्षण शनिवार 4 जुलाई से पूरे राज्य में किया जा रहा है.

यह शिक्षा के अधिकार कानून के तहत राज्य के सारे स्कूलों न जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण है.

इसका मक़सद राज्य में 6 से 14 साल की आयु के हर बच्चे को आधुनिक शिक्षा देना है.

इनमें वो बच्चे शामिल होंगे जो किसी वजह से स्कूल न जाते हों या जिन्होंने पढ़ाई अधूरी छोड़ दी हो या स्कूल में दाखिला लेकर भी स्कूल न जा रहे हों.

सर्वेक्षण का आदेश

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महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग ने पिछले महीने एक पत्र जारी कर बाकी विभागों को इस सर्वेक्षण में सहयोग करने के आदेश दिए हैं.

इस पत्र में सरकार ने कहा है कि जिन मदरसों, गुरुद्वारों और चर्च में आधुनिक शिक्षा न दी जाती हो वहाँ पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल न जाने वाला माना जाएगा.

महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय विवादों के घेरे में आया है. लेकिन मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं.

उनका मानना है कि इस सर्वेक्षण के बाद हर मुसलमान बच्चा जो अभी आधुनिक शिक्षा से वंचित है, वह समाज की मुख्यधारा में आ सकेगा.

धार्मिक शिक्षा

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मुस्लिम बुद्धिजीवी अब्दुल कादर मुकादम ने बीबीसी को बताया, "मदरसों में जाने वाले बच्चे बहुत ही ग़रीब घरों से आते हैं, जो अन्य किसी भी स्कूल में नहीं जा सकते. राज्य सरकार का यह निर्णय मुसलमान बच्चों के लिए फ़ायदेमंद ही साबित होगा."

मुकादम ने कहा, "करीब दो दशक पहले मुस्लिम समाज के नेताओं ने मदरसों के लिए आधुनिक पाठ्यक्रम निश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की थी. इसका उद्देश्य मुस्लिम बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर उन्हें विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए तैयार करना था."

उनका कहना है. "कुछ समय बाद यह प्रक्रिया रुक गई. मैं समझता हूँ कि इस प्रक्रिया को फिर शुरू करना चाहिए क्योंकि जीवन में उन्नति के लिए धार्मिक शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी ज़रूरी है."

शिक्षा का अधिकार क़ानून

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राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार, 2009 के तहत 6 से 14 साल की उम्र के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार प्राप्त है.

लेकिन कई सर्वेक्षणों से यह पता चला है कि अब भी लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं.

सर्वेक्षण के बाद आठ दिन के भीतर इन बच्चों के आधार कार्ड बना लिए जाएंगे. लेकिन कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं.

मुंबई में मदरसा चलने वाले मौलाना महमूद दर्याबादी कहते हैं, "यह सरासर ग़लत निर्णय है. मुंबई और देश में ऐसे कई मदरसे हैं, जहाँ से तालीम हासिल करने वाला छात्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बीए और एमए में दाख़िला ले सकता है."

उनका कहना है, "अगर कोई धार्मिक शिक्षा ले रहा है तो उसे स्कूली पढ़ाई न समझना ग़लत है."

महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा, "हम मदरसों, गुरुद्वारों और चर्च में दी जानेवाली धार्मिक शिक्षा में कतई हस्तक्षेप नहीं करेंगे. हमारा उद्देश्य सिर्फ़ इतना है कि यहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे आधुनिक शिक्षा प्राप्त करें और समाज की मुख्यधारा में आएं."

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