मुर्गी चोरी हो, तो राज्यपाल को बताएं..

  • 5 जुलाई 2015
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उत्तर प्रदेश के रामपुर से आजकल पालतू जानवरों की चोरी की बहुत शिकायतें मिल रही हैं और ये सीधे पहुंच रही हैं राज्यपाल राम नाइक के पास.

रामपुर उत्तर प्रदेश सरकार के चर्चित मंत्री आज़म ख़ान का क्षेत्र है जिनकी भैंसे ख़ासी सुर्ख़ियों में रह चुकी है.

दिलचस्प बात ये है कि मुर्ग़ियों, बकरियों और कुत्तों की चोरी की शिकायत करने वालों की राज्यपाल मदद भी कर रहे हैं.

मुर्गियों की चोरी

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इन शिकायतों की शुरुआत रामपुर के बांग्ला आज़ाद खान मोहल्ले के निवासी फ़रहानउल्लाह ने की.

फ़रहान के मुताबिक़ उनकी 12 मुर्ग़ियां चोरी हो गई थीं. फ़रहान का कहना है कि जब पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी तो उन्होंने लखनऊ में राज्यपाल से गुहार लगाई कि वे उनकी मुर्ग़ियों को ढूंढने के लिए पुलिस को आदेश दें.

उन्होंने इसके बाद राज्यपाल को एक चिट्ठी लिखी. उन्हें राजभवन से जवाबी चिट्ठी मिली.

उसके कुछ ही दिन बाद फ़रहान को आश्चर्य हुआ जब पुलिस उनके घर आकर मुर्ग़ियों के बारे में पूछताछ करने पंहुची.

फ़रहान ने बताया कि राजभवन के दरवाज़े खटखटाने के लिए उन्हें राम नाइक के एक बयान से प्रेरणा मिली, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके दरवाज़े गरीबों के लिए हर वक़्त खुले रहते हैं.

राज्यपाल की मदद

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इसके बाद रज़्मी खान ने अपने कुत्ते और मोईन पठान ने अपनी बकरी खोजने में मदद करने के लिए राज्यपाल से गुहार लगाई.

मोईन पठान ने एक चिट्ठी राज्यपाल को ईमेल की.

राज्यपाल के सूचना अधिकारी अंजुम नक़वी का कहना है कि ऐसी सभी शिकायतों को संबंधित ज़िला अधिकारी को भेज दिया जाता है.

उनके मुताबिक़ "राज्यपाल मानवीयता के आधार पर मदद करते हैं."

लेकिन रामपुर के ज़िला कांग्रेस महासचिव फ़ैसल ख़ान लाला ने आरोप लगाया है कि ये शिकायतें फर्ज़ी हैं और ये सभी लोग आज़म खान के नज़दीकी हैं.

वो कहते हैं कि उन्होंने इस बारे में राज्यपाल को आगाह कर दिया है.

'गरिमा के ख़िलाफ़'

जब मोईन पठान से बीबीसी ने पूछा कि अगर रामपुर पुलिस उनकी शिकायत नहीं लिख रही थी तो उन्होंने आज़म खान की मदद क्यों नहीं ली?

जवाब में पठान राज्यपाल पर सवाल उठाने से नहीं चूकते.

वो कहते हैं, "राज्यपाल ने एक अपराधी की मदद करके अपने पद की गरिमा गिराई है. जिस अपराधी के घर पुलिस ने छापा मारा था, उसकी मदद यदि राज्यपाल कर सकते हैं तो हमने भी उनसे मदद मांग ली."

पठान 'अपराधी' फ़ैसल खान लाला को बताते हैं.

फ़ैसल खान ने उस छात्र की मदद की थी जिसे आज़म खान के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक पर की गई टिप्पणी की वजह से जेल भेज दिया गया था.

फ़ैसल ने राज्यपाल से मिलकर आरोप लगाया था कि ज़िला प्रशासन आज़म के इशारे पर उन्हें परेशान कर रहा है.

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