सेल्फ़ी की बजाय बेटी को शिक्षा दें: श्रुति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सेल्फी विद डॉटर' अभियान पर टिप्पणी कर सुर्ख़ियों में आईं अभिनेत्री श्रुति सेठ का कहना है कि सेल्फ़ी लेने की बजाय किसी बेटी की शिक्षा में मदद करने से बदलाव आएगा.

ट्विटर पर 'सेल्फ़ी विद डॉटर' अभियान के बारे में टिप्पणी करने के बाद श्रुति को सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों की आलोचना का शिकार होना पड़ा.

बीबीसी हिंदी रेडियो के साप्ताहिक कार्यक्रम इंडिया बोल में हिस्सा लेते हुए श्रुति सेठ ने कहा, “हमारे देश में औरतों के प्रति अभी बहुत सारे पूर्वाग्रह हैं और इसी वजह से देश में कन्या शिशु हत्या या कन्या भ्रूण हत्या होती रहती है और जो बच्चियां पैदा होती हैं उनके खिलाफ़ भी एक गहरी नफ़रत का भाव होता है."

उनका कहना था, "जाने कैसे यह हमारे देश में चलन बन गया है और हम सभी उसे आम बात मानने लगे हैं और उसके ख़िलाफ़ सवाल नहीं करते हैं."

"हमारे देश में सबसे पहले औरतों के लिए एक अच्छा समाज बनाया जाए. जब तक वो नहीं होगा तब तक बेटियों को लाकर हम उन्हें किस तरह की ज़िंदगी देंगे."

भद्दी टिप्पणियां

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सोशल मीडिया पर आई टिप्पणियों पर वो कहती हैं, "जब मैंने प्रधानमंत्री के सेल्फ़ी विद डॉटर अभियान पर सवाल खड़ा किया तो सोशल मीडिया पर मुझसे कहा गया कि इसने मुसलमान के साथ शादी की है, इससे क्या अपेक्षा की जाए. वो सिर्फ प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ ही बोलेगी."

उनके मुताबिक़, "सोशल मीडिया पर मुझसे यहां तक कहा गया कि क्या बचपन में तुम्हारा यौन शोषण किया गया था. क्या इसीलिए अपने पिता के साथ सेल्फ़ी नहीं लेना चाहतीं? इस तरह की घटिया सोच है हमारे देश में."

शिक्षा से आएगा बदलाव

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श्रुति का कहना था, "बेटियों को पैदा होने देना महज एक क़दम है. लेकिन उसके बाद, अगर हर चीज के लिए उन्हें इजाज़त लेनी होगी कि क्या वो स्कूल जा सकती हैं या क्या वो करियर को आगे बढ़ा सकती हैं या अपनी मर्जी से शादी कर सकती हैं, तो फ़िर ये 'सेल्फ़ी विद डॉटर' का कोई मतलब नहीं रह जाता."

उन्होंने कहा, "अगर महिला के साथ कहीं भी ग़लत व्यवहार हो रहा है और हम उसे ठीक से न्याय नहीं दिला पा रहे, तब 'सेल्फ़ी विद डॉटर' बस एक फ़ोटोग्राफ़ बनकर रह जाएगा."

श्रुति का कहना है, "मेरी 11 महीने की बेटी है और मेरी यही सलाह है कि आप अपनी बेटी की सेल्फ़ी लेने की बजाय अगर किसी बेटी की शिक्षा में मदद करें तो वो सबसे बड़ा बदलाव लाएगा."

ऐसे शुरू हुआ अभियान

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Image caption अपनी बेटी के साथ सुनील जगलान.

पहली बार 'सेल्फ़ी विद डॉटर' की मुहिम छेड़ने वाले हरियाणा के जींद ज़िले में बीबीपुर के सरपंच सुनील जलान भी 'इंडिया बोल' कार्यक्रम में शामिल हुए.

उनका कहना था, "समाज में बहुत से लोग हैं और किसी महिला के टाइमलाइन पर जाकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करना बेहत ग़लत बात है. ये उन लोगों की सोच को दिखाता है."

'बेटियों के साथ सेल्फ़ी' की अनूठी पहल

अपने अभियान के बारे में उन्होंने बताया, "पिछली नौ जून को मैंने अपने गांव के लोगों के लिए यह 'सेल्फ़ी विद डॉटर' अभियान शुरू किया था क्योंकि हमारे गांव का लिंगानुपात बहुत कम था."

आन्दोलन

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वो कहते हैं, "अब तो सामाजिक सरोकार के आन्दोलन होना ही बंद हो गए. अगर दिल्ली और देश की सरकारें मीडिया और सोशल मीडिया की वजह से बन गईं, तो ये क्यों नहीं हो सकता कि सामाजिक सरोकार का विषय भी हिट हो जाए.”

सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ अभद्रता से पेश आने के मुद्दों पर वो कहते हैं, "हम इसी सोच के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं. हम पिछले पांच साल से महिला सशक्तिकरण को लेकर अभियान चला रहे हैं और पिछले तीन सालों में बीबीपुर के लिंगानुपात में फ़र्क पड़ा है."

उनके मुताबिक़, "ये छोटी छोटी कोशिशें ही बदलाव लाएंगी."

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