किन्नरों के मेले में एक माँ

मंगला, किन्नर अभया की माँ
Image caption अभिना अपनी माँ मंगला के साथ. ये समलैंगिक क्या होता है.

दिल्ली में तीसरे नेशनल किन्नर हब्बा-2015 का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से करीब 300 किन्नर जुटे.

इस मेले में सत्तर साल की महिला मंगला से मुलाक़ात हुई, जिनके अनुसार किन्नरों से डरने की ज़रूरत नहीं है बल्कि इनको समझने की ज़रूरत है.

मंगला का बेटा अभिजीत इकोनॉमिक्स का टॉपर रह चुका है. अब वो किन्नर और समलैंगिक लोगों के अधिकारों के लिए काम करता है.

मंगला का कहना है कि एक दिन उनके बेटे ने उनसे कहा कि वो लड़की बनना चाहता है, वो दिन मंगला के लिए हैरान करने वाला था.

मंगला बताती हैं की वो हर क़दम पर अपने बेटे के साथ रहीं चाहे वो ब्रेस्ट ट्रंसप्लांट हो या उसकी कोई भी बात.

बेटा बना बेटी

Image caption मंगला हर कार्यक्रम में अभया के साथ जाती हैं.

बेटा अभिजीत जो अभिना बन गया. किन्नर समारोह में मंगला अपने बेटे का साहस बढ़ाने जाती हैं.

अमूमन किसी भी सेमिनार की शुरुआत थोड़ी बोरिंग होती है, लेकिन यहाँ सब कुछ बेहद दिलचस्प और अलग रहा.

सत्तर साल की मंगला को फ़िल्म पाकीज़ा के गाने में नाचते हुए देखकर हॉल में बैठे लोग झूम उठे.

अभिना 'पहचान प्रोजेक्ट' में प्रोग्राम मैनेजर हैं और माँ को अपनी 'बेटी' पर नाज़ हैं.

उसकी इस यात्रा में इस माँ ने उसका साथ नहीं छोड़ा. उन्हें ये बात समझ आ गई कि ये भी उसी समाज का हिस्सा हैं जहाँ के हम हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार