डिजिटल इंडिया: 'दिल्ली अब दूर नहीं लगेगी?'

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भारत सरकार अब ऐसा ऐप ला रही है जिसके इस्तेमाल से बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के दूरदराज़ गांवों में बैठे लोग वहीं से दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में इलाज़ के लिए तारीख़ और नंबर ले सकेंगे.

अब तक होता यह है कि इलाज के लिए लोग दिल्ली आते हैं, लाइन में नंबर लगाते हैं और कई दिनों तक दिल्ली में डॉक्टर से मिलने का इंतज़ार करते हैं. अब वे इस परेशानी से बच जाएँगे.

केंद्रीय प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ये जानकारी दी है.

उनके अनुसार ऐप से कई राज्यों से आने वाले मरीज़ों का समय बचेगा और ये डिजिटल इंडिया योजना को आम आदमी के जीवन को सुलभ बनाने के तहत होगा.

मोबाइल फ़ोन से जुड़ता भारत

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भारत में लगभग 98 करोड़ लोगों के पास मोबाइल फ़ोन हैं. हर महीने 50 से 60 लाख नए मोबाइल फोन इसमें जुड़ते हैं.

रविशंकर प्रसाद का कहना है, "इस योजना के तहत हर शहरी या ग्रामीण व्यक्ति के पास मोबाइल फ़ोन होगा और वो सरकार से जुड़ सकेगा. प्रधानमंत्री कहते हैं कि शासन एक आम आदमी की हथेली पर होना चाहिए."

प्रसाद ने बताया, "इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नॉलॉजी, डिजिटल साक्षरता और मोबाइल फ़ोन -- इन सभी माध्यमों से हम देश को कैसे आगे बढ़ाएं, यही डिजिटल इंडिया का उद्देश्य है."

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प्रसाद के अनुसार डिजिटल इंडिया मुहिम अगले कुछ सालों में देश का चेहरा बदलने की क्षमता रखती है.

"मैं बीबीसी के माध्यम से कहना चाहता हूँ कि जब मैं मंत्री बना तो मैंने देश के आईटी भूगोल को देखा तो इसमें दिल्ली, नॉएडा, गुड़गांव, पुणे मुंबई, चेन्नई हैदराबाद, मैसूर और बैंगलोर जैसे शहर ही नज़र आए. तो हमने छोटे शहरों में बीपीओ योजना शुरू की. मैं चाहता हूँ कि भागलपुर, मुजफ्फरपुर, सहारनपुर, गोरखपुर, बलिया, जबलपुर, जोधपुर जैसे शहरों में बीपीओ खुलें."

पोस्ट ऑफ़िस होगा डिजिटल केंद्र

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के अनुसार डिजिटल इंडिया योजना के अंतर्गत अगले कुछ सालों में सरकार पांच करोड़ नई नौकरियां पैदा करेगी.

डिजिटल इंडिया का सरकारी बजट एक लाख करोड़ रुपए का है. लेकिन इसके उद्घाटन के समय कई उद्योगपतियों ने अरबों रुपए की योजनाओं का एलान किया.

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रवि शंकर प्रसाद ने बीबीसी को बताया कि पूरे देश में डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस को डिजिटल केंद्र बनाया जाएगा. हर पोस्टमैन को एक मोबाइल फ़ोन दिया जाएगा जिसका इस्तेमाल पोस्टल सुविधाओं के लिए किया जाएगा.

बाधाएँ और आश्वासन

इस योजना को लागू करने में कई बाधाएं भी हैं. उदाहरण के तौर पर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के बिछाने में हो रही देरी.

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यूपीए सरकार ने 2011 में दूर दराज़ गाँव तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने का काम शुरू किया था. तारों के इस जाल को ढाई लाख गावों तक ले जाना है. अब तक 47 हज़ार गाँवों तक ही ये तारें पहुँच पायी हैं.

ये काम बहुत धीमी गति से चल रहा है क्योंकि कई राज्य सरकारें इस काम को खुद करना चाहती हैं. रविशंकर प्रसाद ने कहा, "आपको जानकार ख़ुशी होगी कि 10 राज्य सरकारें लिखित रूप से सहायता के लिए तैयार हो गयी हैं. रफ़्तार बढ़ेगी"

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